महाराष्ट्र में दूध में मिलावट से जुड़े एक बड़े मामले ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। एक जांच के दौरान सामने आया कि नकली (सिंथेटिक) दूध तैयार करने के लिए पानी, यूरिया और अन्य सस्ते रसायनों के साथ डिटर्जेंट पाउडर का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच अधिकारियों के अनुसार, डिटर्जेंट मिलाने का उद्देश्य दूध को असली जैसा सफेद, गाढ़ा और झागदार दिखाना था, ताकि मिलावट आसानी से पकड़ में न आए।
महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि मिलावटखोर कथित तौर पर सिंथेटिक दूध को शुद्ध दूध में मिलाकर बाजार में सप्लाई कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि पिछले कुछ महीनों में बड़ी मात्रा में ऐसा मिलावटी दूध बाजार तक पहुंचा हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिटर्जेंट, यूरिया और अन्य रासायनिक पदार्थों से तैयार सिंथेटिक दूध का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इससे पेट दर्द, उल्टी, दस्त, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, किडनी और लीवर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए इसका खतरा और अधिक माना जाता है।
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं को केवल विश्वसनीय ब्रांड या भरोसेमंद डेयरी स्रोतों से दूध खरीदने की सलाह दी है। यदि दूध को जोर से हिलाने पर असामान्य रूप से अधिक और लंबे समय तक झाग बने या उसकी गंध एवं स्वाद में बदलाव महसूस हो, तो उसकी जांच करानी चाहिए और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए। हालांकि, केवल झाग बनने के आधार पर किसी दूध को मिलावटी नहीं माना जा सकता; इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही होती है।
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