चंद रुपयों के लिए हमारी सांसों का सौदा...
आजकल हमारे देश में खाने-पीने की चीजों में मिलावट का धंधा बड़े पैमाने पर पैर पसार चुका है। दूध, घी, मसाले, तेल से लेकर फल और सब्जियों तक, ऐसा कोई खाद्य पदार्थ नहीं बचा है जिसे चंद पैसों के लालच में जहरीला न बनाया जा रहा हो। चंद मुनाफाखोर अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने के लिए मासूम लोगों की जिंदगी और सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। नकली मावा, केमिकल से पकाए गए फल, और चॉक पाउडर मिली हुई मिठाइयां आज बाजार में धड़ल्ले से बिक रही हैं। यह सिर्फ एक व्यापारिक धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर मानव जीवन के खिलाफ एक गंभीर अपराध है। इस मिलावटखोरी के कारण कैंसर, लिवर की बीमारियां और पेट के गंभीर रोग घर-घर की कहानी बनते जा रहे हैं। जब तक सरकार कड़े कानून लागू नहीं करेगी, भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम नहीं कसेगी और हम खुद एक जागरूक उपभोक्ता बनकर आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक इन मिलावटखोरों का यह ‘स्लो पॉइजन’ (धीमा जहर) बेचने का काला कारोबार ऐसे ही फलता-फूलता रहेगा। अब समय आ गया है कि इस मुनाफे की भूख के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं ताकि आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ भविष्य दिया जा सके।
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