16 अगस्त 2026: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की तैयारी कैसे की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकियों को लेकर क्या संदेश दिया था, इसका खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने किया है। डिस्कवरी की नई डॉक्यूमेंट्री में अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर के पीछे की रणनीति और तैयारियों से जुड़ी अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पहलगाम में निहत्थे पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश बेहद स्पष्ट था। डोभाल के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकियों को लेकर कहा था कि गुनहगार चाहे जमीन में हों, आसमान में हों या पाताल में, उन्हें ढूंढकर खत्म किया जाएगा।
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुई कार्रवाई की तैयारी
पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया था। इस हमले के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था। सरकार के सामने आतंकवादियों और उनके समर्थकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चुनौती थी। अजीत डोभाल ने डॉक्यूमेंट्री में बताया कि हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति का गंभीरता से आकलन किया और आगे की कार्रवाई के लिए रणनीति तैयार की। इसी प्रक्रिया ने आगे चलकर ऑपरेशन सिंदूर का रूप लिया।
PM मोदी का साफ संदेश
डोभाल ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की ओर से सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट संदेश दिया गया था कि आतंकवादियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। उनका संदेश था कि अपराधी चाहे कहीं भी छिपे हों, उन्हें खोजकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस संदेश के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने ऑपरेशन की योजना, लक्ष्य और संभावित चुनौतियों पर काम शुरू किया।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
ऑपरेशन सिंदूर भारत की ओर से आतंकवाद के खिलाफ की गई एक महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई थी। इसका उद्देश्य आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाना और पहलगाम हमले के पीछे मौजूद आतंकी नेटवर्क को जवाब देना था। डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री में अजीत डोभाल द्वारा साझा की गई जानकारी से इस ऑपरेशन की तैयारी और उसके पीछे लिए गए रणनीतिक फैसलों पर नई जानकारी सामने आई है।
अजीत डोभाल ने बताया कैसे बनी रणनीति
NSA अजीत डोभाल देश की सुरक्षा रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉक्यूमेंट्री में उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि इसके पीछे विस्तृत तैयारी, खुफिया जानकारी और रणनीतिक आकलन शामिल था। पहलगाम हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति और प्रतिक्रिया को लेकर कड़ा रुख अपनाया। इसी के तहत सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित कार्रवाई की दिशा में काम किया।
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