नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। लगातार तीसरे दिन भी देश के कई हिस्सों में खोज और बचाव अभियान जारी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच करीब 320 भारतीय नागरिकों के भी लापता होने की खबर है। नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार ने युद्धस्तर पर राहत और बचाव प्रयास शुरू कर दिए हैं। स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय, काठमांडू में भारतीय दूतावास और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं। इस बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय श्रद्धालुओं को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 400 भारतीय श्रद्धालु तिब्बत सीमा के आसपास फंसे हुए हैं। खराब मौसम, बाढ़ और रास्तों के क्षतिग्रस्त होने के कारण उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं। भारतीय एजेंसियां और दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इन लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रेड क्रॉस के अनुमान के अनुसार, करीब 93 हजार लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं, जबकि यूनिसेफ ने लगभग 17 हजार बच्चों को तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत बताई है। कई इलाकों में सड़कें, पुल और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे राहत कार्यों में बाधा आ रही है। नेपाल की इस आपदा का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में गंडक नदी के जरिए नेपाल से बहकर आए 10 शव मिलने की खबर सामने आई है। महाराजगंज और कुशीनगर के आसपास नदी किनारे शव मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। नेपाल में लगातार जारी भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में भोजन, दवाइयां और जरूरी सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। वहीं, भारत सरकार ने नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी को प्राथमिकता दी है। नेपाल में जारी इस भीषण प्राकृतिक आपदा में मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

