मुंबई: मुख्यमंत्री आवास कैटरिंग ठेका को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के सरकारी आवासों पर भोजन एवं जलपान (कैटरिंग) की व्यवस्था के लिए 9.85 करोड़ रुपये का नया ठेका मंजूर किया है। यह अनुबंध 20 जुलाई 2026 से 19 जुलाई 2030 तक यानी चार वर्षों के लिए लागू रहेगा। सरकारी आदेश के अनुसार यह ठेका मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘वर्षा’ तथा उपमुख्यमंत्रियों के आधिकारिक आवासों ‘सागर’ और ‘देवगिरी’ में भोजन, नाश्ता, चाय, कॉफी और अन्य खानपान सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए दिया गया है। इन आवासों पर मंत्रियों, अधिकारियों, प्रतिनिधिमंडलों और अन्य सरकारी मेहमानों के आने-जाने के कारण नियमित रूप से कैटरिंग सेवाओं की आवश्यकता होती है।
टेंडर प्रक्रिया और अनुबंध की शर्तें
महाराष्ट्र सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा जारी प्रक्रिया के तहत यह टेंडर आवंटित किया गया है। अनुबंध की शर्तों के अनुसार:
- यह टेंडर अगले 4 वर्षों (2026 से 2030) के लिए वैध रहेगा।
- इसमें प्रतिदिन की बैठकों, कैबिनेट बैठकों, और VIP मेहमानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले भोजन और चाय-नाश्ते का प्रबंध शामिल है।
- खानपान की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण का भी प्रावधान रखा गया है।
किन-किन मुख्य मौकों पर होती है कैटरिंग सेवा?
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के आधिकारिक आवासों में हर दिन दर्जनों बैठकें होती हैं। इस कैटरिंग अनुबंध का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित अवसरों पर भोजन एवं जलपान उपलब्ध कराना है:
- कैबिनेट और प्रशासनिक बैठकें: राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के साथ होने वाली बैठकें।
- विदेशी और राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल: राज्य में आने वाले अन्य राज्यों व देशों के गणमान्य अतिथियों का आतिथ्य।
- सार्वजनिक बैठकें और जनसुनवाई: विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधिमंडलों के दौरे।
विपक्ष और जनता की प्रतिक्रिया
इस 9.85 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का तर्क है कि जब राज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं और सामाजिक योजनाओं के लिए बजट आवंटन की आवश्यकता है, तब सरकारी आवासों के खानपान पर इतना भारी-भरकम बजट खर्च करना अनुचित है। दूसरी ओर, सरकार ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि यह कोई नया या असाधारण खर्च नहीं है, बल्कि चार वर्षों के लिए तय किया गया एक नियमित प्रशासनिक और सुरक्षात्मक कैटरिंग अनुबंध है।
सरकार का कहना है कि यह अनुबंध पूरी तरह सरकारी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के तहत दिया गया है। चार वर्षों की अवधि में होने वाले खर्च को मिलाकर कुल अनुबंध मूल्य 9.85 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इसमें भोजन तैयार करने, परोसने और संबंधित सेवाओं का खर्च शामिल है।
हालांकि, इस निर्णय को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस भी शुरू हो गई है। विपक्ष का कहना है कि राज्य में वित्तीय चुनौतियों के बीच सरकारी आवासों के खानपान पर इतने बड़े खर्च को उचित ठहराना कठिन है। वहीं सरकार का पक्ष है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के सरकारी आवासों पर प्रतिदिन होने वाली आधिकारिक बैठकों और आगंतुकों को देखते हुए यह एक नियमित प्रशासनिक व्यय है।
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