ठंडे रेगिस्तान के नाम से जाने जाने वाले लद्दाख ने जल संकट से निपटने और अपनी बंजर होती जमीनों को उपजाऊ बनाने की दिशा में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कदम उठाया है। लद्दाख में ग्लेशियर पानी का संरक्षण: 9 करोड़ लीटर पानी से बदलेगी खेती, क्षेत्र में पानी की बढ़ती किल्लत के बीच लद्दाख प्रशासन ने एक ऐसी तरकीब निकाली है, जिससे न केवल सिंधु नदी में बेकार बह जाने वाला पानी रुक गया है, बल्कि स्थानीय किसानों की किस्मत भी बदलने लगी है। प्रशासन ने रोजाना 90 मिलियन (9 करोड़) लीटर ग्लेशियर के पानी का सफलतापूर्वक रुख मोड़कर इसे सिंचाई के काम में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
यह पूरी परियोजना लेह स्थित स्तोक गांव के नाले से शुरू होती है, जहां से ग्लेशियर के पिघले हुए पानी को मोड़कर प्रसिद्ध ‘इगू-फे सिंचाई नहर’ में डाला जा रहा है। इस अनोखी पहल से इलाके के लगभग 12 गांवों को सीधे तौर पर पानी मिलेगा, जिससे 1000 एकड़ से भी अधिक सूखी और बंजर पड़ी जमीन की सिंचाई मुमकिन हो सकेगी। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण-अनुकूल और किफायती होना है; बिना किसी भारी-भरकम बजट या बड़े निर्माण के, केवल साधारण मिट्टी के कार्यों (Earthwork) के जरिए इस धारा को मोड़ा गया है।
लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना और स्थानीय प्रशासन के इस इनोवेशन की तारीफ देशभर में हो रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर इस प्रयास की खुलकर सराहना की और LG लद्दाख को बधाई दी। थरूर ने अपनी हालिया संसदीय समिति की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि लद्दाख जिस तरह से बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए टिकाऊ विकास के रास्ते पर बढ़ रहा है, वह पूरे देश के लिए जल संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन की एक बेहतरीन मिसाल है। यह मॉडल आने वाले दिनों में अन्य पहाड़ी इलाकों के लिए भी एक नई राह दिखाएगा।

