मिलावट के इस दौर में आम उपभोक्ताओं को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बेहद अनूठी और उपयोगी बुकलेट जारी की है, जिसे ‘DART Book’ (Detect Adulteration with Rapid Test) कहा जाता है। इस गाइडबुक का सीधा और मुख्य उद्देश्य यह है कि हर नागरिक बिना किसी महंगी मशीन या लैब के, अपने घर की रसोई में ही केवल ५ मिनट के भीतर भोजन में होने वाली मिलावट को खुद पकड़ सके। इस पूरी बुकलेट में दूध, घी, तेल, मसालों, अनाज और सब्जियों जैसी रोजमर्रा की खाद्य सामग्रियों में शुद्धता की जांच करने के ५० से ज्यादा बेहद आसान और घरेलू तरीके (Rapid Tests) विस्तार से बताए गए हैं। इस बुकलेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दिए गए सभी टेस्ट पूरी तरह से वैज्ञानिक हैं, लेकिन इन्हें करने के लिए आपको सिर्फ घर में मौजूद साधारण चीजों जैसे—साफ पानी, रुई, कांच का गिलास, आयोडीन या नींबू के रस की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, चायपत्ती में लोहे का चूरा पकड़ने के लिए चुंबक का इस्तेमाल, हरी सब्जियों पर ‘मैलाकाइट ग्रीन‘ केमिकल को पकड़ने के लिए लिक्विड पैराफिन या कुकिंग ऑयल में भीगी रुई का टेस्ट, और काली मिर्च में पपीते के बीजों की पहचान करने जैसे कई जादुई तरीके इस बुकलेट में सचित्र (इमेज के साथ) समझाए गए हैं। साधारण शब्दों में कहें तो यह बुकलेट हर उस परिवार के लिए एक सुरक्षा कवच है, जो बाजार की चमक-दमक के पीछे छिपे मिलावट के जहर से अपनों की सेहत को बचाना चाहता है।
१. दूध और डेयरी उत्पाद
- दूध में डिटर्जेंट की जांच: एक कांच की शीशी या बोतल में थोड़ा सा दूध लें। उसमें बराबर मात्रा में पानी मिलाएं और शीशी को जोर-जोर से हिलाएं। अगर दूध में झाग (foamy) बनता है और वह देर तक टिका रहता है, तो दूध में डिटर्जेंट मिलाया गया है। शुद्ध दूध में बहुत कम झाग बनता है जो तुरंत गायब हो जाता है।
- दूध-पनीर में स्टार्च (मावा/आलू) की जांच: दूध, खोया या पनीर का एक सैंपल लें। उसे पानी में उबालें और फिर ठंडा होने दें। इसके बाद इसमें आयोडीन सॉल्यूशन (iodine) की २-३ बूंदें डालें। अगर सैंपल का रंग गहरा नीला (blue) हो जाता है, तो इसका मतलब है कि इसमें स्टार्च या उबला हुआ आलू मिलाया गया है।
- दूध में पानी की मिलावट (Slanting test): दूध की एक बूंद को लकड़ी या पत्थर की ढलान वाली सतह पर टपकाएं। शुद्ध दूध धीरे-धीरे बहेगा और अपने पीछे एक सफेद लकीर (trace) छोड़ जाएगा। पानी मिला हुआ दूध बिना कोई निशान छोड़े तेजी से बह जाएगा।
२. मसाले और तेल (Spices and Oils)
- सिल्वर फॉयल (चांदी का वर्क) बनाम एल्युमिनियम: मिठाइयों पर लगे चांदी के वर्क को उंगलियों के बीच रखकर रगड़ें। अगर वह आसानी से टूटकर गायब हो जाता है, तो वह शुद्ध चांदी है। अगर वह उंगलियों पर चिपक जाता है और भूरा/काला पड़ने लगता है, तो वह सेहत के लिए खतरनाक एल्युमिनियम फॉयल है। आप इसे आग पर जलाकर भी देख सकते हैं; शुद्ध चांदी का वर्क आग में नहीं जलता, जबकि एल्युमिनियम तुरंत जलकर काली राख बन जाता है।
- सरसों के तेल में अर्जीमोन (सत्यानाशी) का तेल: एक टेस्ट ट्यूब या कांच के गिलास में थोड़ा सा सरसों का तेल लें। इसमें कुछ बूंदें कॉन्सेन्ट्रेटेड नाइट्रिक एसिड (Concentrated Nitric Acid) की मिलाएं और धीरे से हिलाएं। अगर तेल की निचली परत में लाल या मटमैला लाल रंग दिखाई दे, तो तेल में अर्जीमोन के जहरीले तेल की मिलावट है।
- हल्दी पाउडर में लेड क्रोमेट (पीला सिंथेटिक रंग): एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच हल्दी पाउडर डालें। इसे बिना हिलाए १५-२० मिनट के लिए छोड़ दें। शुद्ध हल्दी नीचे बैठ जाएगी और पानी हल्का साफ पीला रहेगा। अगर पानी का रंग गाढ़ा, चमकदार पीला बना रहता है और हल्दी नीचे नहीं बैठती, तो उसमें सिंथेटिक रंग या लेड क्रोमेट मिला हुआ है।
३. रोजमर्रा की अन्य चीजें (Daily Products)
- शहद में चाशनी या पानी की मिलावट: एक कांच के गिलास में पानी भरें। इसमें ऊपर से एक चम्मच शहद सीधे गिराएं। शुद्ध शहद बिना पानी में घुले सीधा गिलास की तली (bottom) में जाकर बैठ जाएगा। अगर शहद पानी में गिरते ही घुलने लगे या फैल जाए, तो उसमें चीनी की चाशनी या पानी मिलाया गया है।
- कॉफी पाउडर में चिकोरी (chicory) या खजूर के बीजों का चूरा: एक गिलास साफ पानी लें और उसकी सतह पर एक चम्मच कॉफी पाउडर छिड़कें। शुद्ध कॉफी पाउडर पानी की सतह पर तैरता रहेगा और आसानी से नीचे नहीं बैठेगा। चिकोरी का चूरा पानी सोखकर तुरंत नीचे बैठना शुरू कर देगा और पानी में अपना भूरा रंग छोड़ने लगेगा।
- नमक में चौक का चूरा या रेत: एक गिलास पानी में एक चम्मच नमक घोलें। शुद्ध नमक पानी में पूरी तरह घुल जाएगा और पानी साफ रहेगा। अगर नमक में चौक का चूरा या सफेद बालू रेत मिली होगी, तो वह पानी को धुंधला (blurry) कर देगी और अघुलनशील पाउडर गिलास के नीचे जमा हो जाएगा।
नोट: ये टेस्ट FSSAI द्वारा प्रमाणित हैं और इन्हें करने के लिए किसी वैज्ञानिक अनुभव की आवश्यकता नहीं है। इन आसान तरीकों को अपनाकर हर परिवार जागरूक उपभोक्ता बन सकता है।
Read Also:‘हाई सैलरी’ का भ्रम: शहरों में लाखों कमाने वाले प्रोफेशनल्स क्यों जूझ रहे हैं पैसों की तंगी से?

