मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल करोड़ों रुपये के दान की चोरी का दावा किया है। वहीं दूसरी तरफ, मंदिर न्यास (Trust) ने इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए मामले का सच सामने रखा है।
1. राज ठाकरे का दावा क्या है?
मनसे (MNS) के छात्र पंख के एक कार्यक्रम में बोलते हुए राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि सिद्धिविनायक मंदिर की दानपेटी से हर साल करीब ₹18 करोड़ की चोरी हो रही थी।
- सबूत का दावा: उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के ही 8 सदस्यों (Trustees) ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर इस हेरफेर की जांच की मांग की थी।
- आंकड़े का तर्क: ठाकरे के अनुसार, चोरी पकड़े जाने से पहले मंदिर का साप्ताहिक दान ₹50 लाख से कम था, जो आरोपियों पर कार्रवाई के बाद बढ़कर ₹1.5 करोड़ प्रति सप्ताह हो गया।
मंदिर ट्रस्ट (सदा सरवणकर) की क्या सफाई है?
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और शिवसेना नेता सदा सरवणकर ने राज ठाकरे के बयानों का खंडन करते हुए स्थिति स्पष्ट की:
- कोई 18 करोड़ का घोटाला नहीं: सरवणकर ने कहा कि राज ठाकरे ने ट्रस्टियों द्वारा लिखे गए पत्र का गलत मतलब निकाला है।
- कर्मचारियों पर कार्रवाई: ट्रस्ट ने खुद आंतरिक निगरानी के जरिए दानपेटी से पैसे चुराने वाले 9 कर्मचारियों को पकड़ा और उनके खिलाफ पुलिस केस दर्ज कराया।
- प्रशासनिक सुधार का नतीजा: सरवणकर ने स्पष्ट किया कि कड़े सुरक्षा इंतजामों और नई व्यवस्था के कारण मंदिर की कुल वार्षिक आय पिछले दो वर्षों में ₹114 करोड़ से बढ़कर ₹182 करोड़ हो गई है।
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