ताजा खबरें
July 26, 2026

फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र घोटाला:महाराष्ट्र में ३१६ सरकारी कर्मचारी निलंबित

viklang ghota

महाराष्ट्र में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने का बड़ा मामला सामने आया है। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र घोटाला:महाराष्ट्र में ३१६ सरकारी कर्मचारी निलंबित, राज्य सरकार की जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद ३१६ सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई दिव्यांग श्रेणी में की गई नियुक्तियों की जांच के दौरान सामने आई गड़बड़ियों के बाद की गई है।मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों में दिव्यांग प्रमाणपत्रों की व्यापक जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ही बड़ी संख्या में संदिग्ध प्रमाणपत्र मिलने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के २८ जिलों में दिव्यांग कोटे में नियुक्त कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्य की विभिन्न जिला परिषदों और विभागों में दिव्यांग श्रेणी के तहत कुल १०,९२२ अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत पाए गए हैं। इनमें से अब तक ६,२१८ मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। जांच के दौरान यह पाया गया कि कई कर्मचारियों के पास मौजूद दिव्यांग प्रमाणपत्र या तो संदिग्ध हैं या फिर नियमों के अनुरूप नहीं हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर ३१६ कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि बाकी मामलों की जांच अभी जारी है। प्रारंभिक जांच में जिन अनियमितताओं का पता चला है, उनमें मुख्य रूप से तीन तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं—

इन आरोपों के आधार पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब भाजपा विधायक Shrikant Bharatiya ने महाराष्ट्र विधानसभा में दिव्यांग श्रेणी में की गई नियुक्तियों को लेकर सवाल उठाया। इसके जवाब में राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री Atul Save ने सदन में जानकारी दी कि राज्य सरकार ने इस मामले की जांच शुरू की है और जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर ३१६ कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार अभी लगभग ५ हजार से अधिक कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों की जांच बाकी है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी संदिग्ध मामले सामने आ सकते हैं।
सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि दिव्यांग प्रमाणपत्रों की पूरी तरह से जांच की जाए और यदि कोई कर्मचारी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र का इस्तेमाल केवल नियमों का उल्लंघन ही नहीं है, बल्कि इससे उन लोगों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं जिन्हें वास्तव में सरकारी सुविधाओं और नौकरियों की जरूरत होती है। दिव्यांग श्रेणी का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग को अवसर देना है, लेकिन यदि इस तरह के फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग किया जाता है तो इससे व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं। दिव्यांग अधिकारों से जुड़े कानून Rights of Persons with Disabilities Act, २०१६ के तहत फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने या उसका इस्तेमाल करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना और जेल दोनों की सजा हो सकती है।
सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र घोटाले का यह मामला महाराष्ट्र के प्रशासनिक तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। अभी जांच जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सरकार की सख्त कार्रवाई से यह संकेत भी गया है कि दिव्यांग कोटे के दुरुपयोग को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

स्वर्णिम मुंबई न्यूज़लेटर 👋

हमारी डिजिटल पत्रिका और नई कहानियों की जानकारी सीधे अपने ईमेल पर पाएं।

हम स्पैम नहीं करते! अधिक जानकारी के लिए हमारी प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Monsoon Eye Care Tips अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर तो हो गया… लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। “अक्षय तृतीया का असली मतलब—जो कभी खत्म न हो!” समुद्र की गहराई वहीं छिपी हैं ऐसी मछलियाँ महिलाओं के चेहरे के ये तिल खोल देते हैं किस्मत के दरवाजे!