भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में जल्द ही ₹10 और ₹20 के करेंसी नोटों के रूप में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। कागज के नोटों की जगह प्लास्टिक नोट (पॉलिमर नोट) लाने की तैयारी की जा रही है। इन नए प्लास्टिक नोटों का मुख्य उद्देश्य मुद्रा की उम्र बढ़ाना, कटे-फटे नोटों की समस्या को समाप्त करना और बाजार में नकली नोटों की जालसाजी पर लगाम लगाना है।
क्यों पड़ रही है प्लास्टिक नोटों की जरूरत?
कागज के नोट—खासकर ₹10 और ₹20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग की मुद्राएं—बाजार में सबसे ज्यादा हाथों से गुजरती हैं। दैनिक इस्तेमाल की वजह से ये नोट बहुत जल्दी कट-फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं या पानी व पसीने से खराब हो जाते हैं। नए प्लास्टिक नोट के आने से कई बड़े फायदे होंगे:
- लंबी लाइफ: पॉलिमर से बने प्लास्टिक नोट कागज के पारंपरिक नोटों की तुलना में लगभग 4 से 5 गुना अधिक टिकाऊ होते हैं।
- पानी और गंदगी से बचाव: ये नोट पानी में भीगने पर खराब नहीं होते और इन पर धूल-मिट्टी या मैल आसानी से नहीं जमती।
- नकली नोटों पर रोक: प्लास्टिक करेंसी में अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी नकल करना बेहद कठिन होता है।
- पर्यावरण को फायदा: बार-बार नए नोट छापने का खर्च बचेगा और कागज की खपत कम होगी।
पहले चरण में ट्रायल के तौर पर होगी शुरुआत
RBI शुरुआती चरण में ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट को परीक्षण (Trial) के तौर पर देश के कुछ चुनिंदा शहरों में जारी करेगा। इन शहरों का चयन विभिन्न जलवायु और मौसम (जैसे अत्यधिक नमी, गर्मी और ठंड) के आधार पर किया जाएगा, ताकि नोटों के टिकाऊपन और मजबूती का सही आंकलन किया जा सके।
क्या पुराने कागज के नोट बंद हो जाएंगे?
नहीं, जैसे ही नए प्लास्टिक नोट बाजार में आएंगे, आपके पास मौजूद पुराने कागज के नोट भी पूरी तरह से वैध (Legal Tender) रहेंगे। रिजर्व बैंक चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे बैंकों के माध्यम से पुराने नोटों को वापस लेगा और उनकी जगह नए नोट चलन में लाएगा, जिससे आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
दुनिया के अन्य देशों में प्लास्टिक करेंसी का अनुभव
ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड जैसे कई देशों में पहले से ही पॉलिमर और प्लास्टिक नोट का उपयोग सफलता के साथ किया जा रहा है। इन देशों में प्लास्टिक करेंसी के कारण नोट छापने की लागत में भारी कमी आई है और मुद्रा सुरक्षा का स्तर भी बेहतर हुआ है। देश में जल्द ही ₹10 और ₹20 के करेंसी नोटों के रूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कागज के नोटों की जगह पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोट लाने की तैयारी में है। इन नए नोटों का मुख्य उद्देश्य मुद्रा की लाइफ बढ़ाना और उसकी जालसाजी पर लगाम लगाना है।
प्लास्टिक नोट से जुड़े मुख्य सवाल और जवाब (FAQ)
क्या प्लास्टिक नोट आसानी से फट सकते हैं?
नहीं, पॉलिमर तकनीक से बने प्लास्टिक नोटों को मोड़ना आसान होता है लेकिन इन्हें आसानी से फाड़ा नहीं जा सकता। ये साधारण कागज के नोटों से 4 से 5 गुना अधिक मजबूत होते हैं।
क्या भारत में पहले भी प्लास्टिक नोट का ट्रायल हुआ है?
जी हाँ, इससे पहले भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के 5 चुनिंदा शहरों (जैसे कोच्चि, जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर और मैसूर) में ₹10 के प्लास्टिक नोटों के फील्ड ट्रायल की योजना बनाई थी।
प्लास्टिक नोटों का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
प्लास्टिक नोट लंबे समय तक चलते हैं, जिससे बार-बार नए नोट छापने की प्रक्रिया कम होती है। इससे पेड़ों की कटाई और छपाई में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की खपत कम होती है, जिससे पर्यावरण को लाभ मिलता है।
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