महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर द्वारा प्रसिद्ध शिक्षाविद् और समाजसेवी प्रो. अच्युत सामंत को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें जनजाति उत्थान, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए उनके अभूतपूर्व एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। यह विशेष दीक्षांत समारोह आज, 31 जुलाई 2026 को प्रातः 11:30 बजे जयपुर स्थित लोकभवन में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता राजस्थान के माननीय राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने की, जिनके कर-कमलों द्वारा भुवनेश्वर (ओडिशा) के समाजसेवी प्रो. अच्युत सामंत को यह मानद उपाधि प्रदान की गई।
प्रो. अच्युत सामंत के योगदान पर कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने जताई प्रसन्नता
विश्वविद्यालय के कुलगुरु (उप-कुलपति) आचार्य मनोज दीक्षित ने प्रो. सामंत के सामाजिक व शैक्षणिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय और वंचित वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उन्होंने समाज सुधार की एक अद्वितीय मिसाल पेश की है। दीक्षांत समारोह में शिक्षा जगत की कई प्रमुख हस्तियों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों और गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया और प्रो. अच्युत सामंत को इस उपलब्धि पर बधाई दी। हालिया महीनों में मिली अन्य उपाधियों को मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 75 के करीब/पार पहुँच चुका है।
शिक्षा और समाज सेवा में अद्वितीय योगदान
प्रोफेसर अच्युत सामंत ने अपने जीवन में हजारों वंचित और जनजातीय बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान कर समाज सुधार की एक नई मिसाल पेश की है। उनके द्वारा स्थापित कीट (KIIT) और कीस (KISS) जैसे संस्थान आज विश्व स्तर पर पहचान बना चुके हैं। देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है और यह मानद उपाधि उनके इसी अतुलनीय योगदान का प्रमाण है।
75 से अधिक मानद डॉक्टरेट उपाधियों का रिकॉर्ड
प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. अच्युत सामंत के नाम देश और दुनिया के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों द्वारा सबसे अधिक मानद डॉक्टरेट उपाधियाँ प्राप्त करने का अटूट रिकॉर्ड दर्ज है। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर द्वारा दी गई यह उपाधि प्रो. अच्युत सामंत के जीवन की 75वीं से अधिक मानद उपाधियों की श्रेणी में शामिल हो गई है।
समाज सेवा और ‘Art of Giving’
प्रो. अच्युत सामंत केवल एक शिक्षाविद् ही नहीं बल्कि एक महान समाज सुधारक भी हैं। उनके द्वारा शुरू किया गया ‘Art of Giving’ (देने की कला) दर्शन आज दुनिया भर के लाखों लोगों को निस्वार्थ सेवा और सहयोग के लिए प्रेरित कर रहा है। प्रो. अच्युत सामंत की यही सोच समाज के हर गरीब और वंचित वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और खुशहाली पहुँचाने का काम कर रही है।
जनजाति उत्थान और सामाजिक परिवर्तन
प्रो. अच्युत सामंत ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाई है, बल्कि ओडिशा के सुदूर जनजातीय इलाकों में शिक्षा का अलख जगाकर हजारों परिवारों के जीवन में सामाजिक परिवर्तन लाने का काम किया है। उनका मानना है कि जब तक समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक शिक्षा नहीं पहुँचेगी, तब तक देश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया यह सम्मान उनके इसी निष्काम कर्म और सेवा भावना की पहचान है।
शिक्षा से सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम
प्रो. अच्युत सामंत का दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा ही समाज में फैली असमानता और गरीबी को दूर करने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने ओडिशा के दूरदराज के क्षेत्रों से आए हजारों जरूरतमंद और वंचित बच्चों को मुफ्त आवास, भोजन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवारने का काम किया है। उनके द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थान आज न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया यह सम्मान उनके इसी निष्काम सेवा भाव और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व योगदान की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि है।
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