बीएमसी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को तलब किया
मुंबई में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता और प्रदूषण रोकने के उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन में देरी को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने शहर में प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से सवाल किया कि जब आम नागरिकों को जहरीली हवा और धुंध के कारण परेशानी हो रही है, तो जिम्मेदार अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण के लिए पर्याप्त कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं।
21 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने मुंबई में प्रदूषण की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि शहर में वायु गुणवत्ता खराब होने के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने से संबंधित निर्देशों का भी उल्लंघन हो रहा है। अदालत के समक्ष ऐसी घटनाओं का उल्लेख किया गया, जिनमें व्यस्त सड़कों पर पटाखे फोड़े जाने और पूर्व निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई।
अदालत ने मुंबई पुलिस आयुक्त को पुलिस थानों के प्रभारियों के साथ बैठक कर निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के प्रमुखों को 26 अक्टूबर को अगली सुनवाई के दौरान उपस्थित होकर प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया गया। अदालत ने जनजागरूकता बढ़ाने और पटाखों से होने वाले वायु तथा ध्वनि प्रदूषण के दुष्परिणामों के बारे में लोगों को सूचित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
मुंबई में निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहनों का धुआँ, यातायात का दबाव और त्योहारों के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआँ वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। प्रदूषण का असर विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए चिंता का विषय है। हालांकि, किसी विशेष दिन के प्रदूषण स्तर का आकलन संबंधित निगरानी केंद्रों के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के आँकड़ों से ही किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि बीएमसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस प्रशासन प्रदूषण रोकने के लिए कौन-से ठोस कदम उठाते हैं। शहरवासियों के लिए साफ हवा सुनिश्चित करना केवल त्योहारों तक सीमित अभियान नहीं, बल्कि पूरे वर्ष लागू रहने वाली प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
