देवनार के प्रकल्प को शुरू करने के लिए तीन महीने की और मोहलत
मुंबई के देवनार कचरा डंपिंग ग्राउंड में कचरे से बिजली बनाने की बहुप्रतीक्षित परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। हालांकि परियोजना को अक्टूबर में शुरू किया जाना था, लेकिन अब इसके लिए दिसंबर तक की अंतिम समय-सीमा तय की गई है। मुंबई महानगरपालिका की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से प्रतिदिन सैकड़ों टन कचरे का उपयोग कर बिजली पैदा करने की योजना है। परियोजना का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है और महानगरपालिका के अनुसार अब इसके दिसंबर के अंत तक शुरू होने की संभावना है। देवनार कचरा भूमिगत क्षेत्र में लंबे समय से बड़ी मात्रा में पुराना कचरा जमा है। महानगरपालिका के आंकड़ों के अनुसार यहां करीब 20 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा हुआ है। इसी कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निपटारे के साथ बिजली उत्पादन करने के उद्देश्य से यह परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना के लिए करीब 1,056 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है। परियोजना के तहत प्रतिदिन लगभग 600 मीट्रिक टन कचरे से 8 मेगावाट तक बिजली उत्पादन करने की योजना है। शुरुआत में परियोजना की क्षमता करीब 4 मेगावाट बिजली उत्पादन की रखी गई थी। लेकिन देवनार में उपलब्ध कचरे की गुणवत्ता और उसकी मात्रा का अध्ययन करने के बाद यह सामने आया कि प्रतिदिन 600 मीट्रिक टन कचरे से करीब 7 से 8 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है। इसके बाद महानगरपालिका ने परियोजना की क्षमता बढ़ाने का फैसला किया। इसके लिए प्रशासन की ओर से केंद्र सरकार के संबंधित विभाग से अनुमति मांगी गई थी। शुरुआती दौर में यह अनुमति नहीं मिली, लेकिन लगातार प्रयासों के बाद केंद्र सरकार से क्षमता बढ़ाने की मंजूरी प्राप्त हुई। इस पूरी प्रक्रिया में समय लगने के कारण परियोजना के काम में भी देरी हुई।
देवनार में कचरे से बिजली बनाने की परियोजना को लेकर न्यायालय के निर्देशों के बाद महानगरपालिका ने इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। इसके बाद निविदा प्रक्रिया पूरी की गई और परियोजना के लिए आवश्यक मंजूरियां हासिल करने का काम शुरू हुआ। परियोजना के लिए पर्यावरण संबंधी अनुमति, तटीय नियमन क्षेत्र यानी सीआरजेड की अनुमति तथा महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल यानी एमपीसीबी की मंजूरी जैसी औपचारिकताएं पूरी की गईं। जून 2022 से परियोजना की योजना और निर्माण कार्य शुरू हुआ था। उस समय उम्मीद थी कि परियोजना अक्टूबर 2025 से बिजली उत्पादन शुरू कर देगी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह समय-सीमा पूरी नहीं हो सकी। परियोजना में देरी को लेकर ठेकेदार की ओर से भी कई कारण बताए गए हैं। इस वर्ष की शुरुआत में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने और ईंधन की कमी पैदा होने का असर परियोजना के काम पर पड़ा। इसके अलावा परियोजना की क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया में भी काफी समय लगा। इन कारणों से परियोजना निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। पहले ठेकेदार को करीब एक वर्ष की अतिरिक्त समय-सीमा दी गई थी और अब इसमें तीन महीने की और मोहलत दी गई है। महानगरपालिका के अनुसार परियोजना का 80 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। अब शेष निर्माण और तकनीकी कार्य तेजी से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि काम निर्धारित गति से आगे बढ़ता है तो दिसंबर के अंत तक देवनार से कचरे के जरिए बिजली उत्पादन शुरू हो सकता है। यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि मुंबई के लगातार बढ़ते कचरा संकट से निपटने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कचरे की छंटाई, प्रसंस्करण और बिजली उत्पादन की पूरी प्रक्रिया कितनी प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से संचालित होती है।
बनी बिजली का इस्तेमाल कहां होगा?
परियोजना से पैदा होने वाली बिजली के इस्तेमाल को लेकर महानगरपालिका के सामने मुख्य रूप से दो विकल्प हैं। पहला विकल्प यह है कि बिजली को बिजली वितरण कंपनियों को बेचा जाए। ऐसी स्थिति में बिजली की बिक्री का दर तय कराने के लिए विद्युत नियामक आयोग के समक्ष आवेदन करना होगा। दूसरा विकल्प यह है कि पैदा होने वाली बिजली का इस्तेमाल मुंबई महानगरपालिका की किसी बड़ी परियोजना में किया जाए। यदि बिजली का उपयोग महानगरपालिका की अपनी परियोजनाओं में किया जाता है तो उसके बिजली खर्च में बचत हो सकती है। देवनार परियोजना की सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि इससे एक तरफ पुराने कचरे के निपटारे में मदद मिलेगी और दूसरी तरफ उसी कचरे से बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा। लेकिन इसके साथ पर्यावरण सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। कचरे को जलाने या उसका प्रसंस्करण करते समय निकलने वाले प्रदूषक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और उत्सर्जन मानकों का कड़ाई से पालन जरूरी होगा। मुंबई जैसे महानगर में यदि यह परियोजना निर्धारित मानकों के अनुसार सफलतापूर्वक चलती है तो भविष्य में कचरे को केवल समस्या मानने के बजाय उससे ऊर्जा पैदा करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।
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