कभी भारत में वर्षा ‘ऋतु’ कही जाती थी — खुशहाली और जीवन का प्रतीक। आज वही वर्षा अचानक आने वाली आपदा बन चुकी है। बेमौसम बारिश… कहीं बाढ़ से तबाही, तो कहीं महीनों तक सूखा — मौसम का संतुलन बिगड़ चुका है। यह केवल प्रकृति का रोष नहीं, बल्कि हमारे विकास मॉडल का परिणाम है, जिसने पर्यावरण को नीतियों के हाशिए पर धकेल दिया है।
Bemousam-barsat
