कम लागत, ज्यादा मुनाफा
भारत में रबी सीजन की फसलों में चना हमेशा से किसान की भरोसेमंद फसल रही है। वजह साफ है— चना की खेती कम पानी में भी अच्छी पैदावार, कम लागत, और बाज़ार में सालभर मजबूत मांग। लेकिन कड़वी सच्चाई ये है कि चना उतना “आसान” नहीं जितना लोग मान लेते हैं। गलत समय, गलत किस्म, खराब ड्रेनेज या फली छेदक जैसी ग़लतियों ने कई किसानों की मेहनत बर्बाद की है। इसलिए चना बोने से पहले सिर्फ पारंपरिक जानकारी नहीं, बल्कि जमीन, मौसम और कीट-रोग की वास्तविक स्थिति के अनुसार सही वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी है। नीचे दिया गया यह पूरा मार्गदर्शन उसी व्यावहारिक सोच पर आधारित है—ताकि फसल सुरक्षित रहे और मुनाफा अधिक मिले।
कौन-सी मिट्टी सबसे बेहतर?
दोमट, भूरी दोमट और काली कपास वाली मिट्टी चने के लिए सर्वश्रेष्ठ। pH ६–७.५ बढ़िया।
पानी रुकने वाली भारी जमीन में चना बीमारियों से जल्दी मरता है।
बुवाई का सही समय
आदर्श: १५ अक्टूबर – ३० नवंबर
लेट बुवाई (दिसंबर): जल्दी पकने वाली किस्में ही भरोसेमंद होती हैं।
प्रमुख किस्में (लेट बुवाई के लिए भी बेहतर)
JG 14
JG 11
JG 130
Vaibhav
GNG 1581
HC (हरियाणा-पंजाब)
बीज दर और बीज उपचार
बीज दर
देसी: ७०–८० kg/acre
काबुली: १००–११० kg/acre
बीज उपचार (अनिवार्य)
यही पौधे को उखटा और जड़ सड़न से बचाता है। CaRendazim/Thiram: 2–3 gm/kg, Trichoderma: 4 gm/kg
Rhizobium + PSB culture: 5 gm/kg



बीज उपचार छोड़ना मतलब बाद में नुकसान तय।
खेत की तैयारी
पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से।
१–२ कल्टीवेशन + पाटा।
हल्की फाइन सीड-बेड चना के लिए आदर्श।
बुवाई की दूरी और विधि
लाइन से लाइन: ३०–४५ cm
पौधे से पौधा: १० cm
ड्रिल या सीड-कम-फर्टिलाइज़र ड्रिल अधिक लाभदायक।
खाद का प्रैक्टिकल फॉर्मूला (per acre)
DAP: 100–120 kg
MOP: 15–20 kg
Gypsum: 50 kg
Sulphur: 20–25 kg (फूल झड़ने से बचाता है) चने को ज्यादा Nitrogen देने से पौधा घना होता है, दाना कम बनता है।
सिंचाई प्रबंधन
चना ‘कम पानी वाली’ फसल है, लेकिन यह फालतू सुखा भी नहीं सहता। पहली सिंचाई: बोने के तुरंत बाद नहीं; फूल आने के समय (४५–५० दिन) दूसरी सिंचाई: दाना भराव (६०–७० दिन)
३ से ज्यादा सिंचाई → रोग का खतरा बढ़ता है।
प्रमुख कीट और रोग
१. उखटा/जड़ सड़न
कारण: ठंड + नमी
बचाव: बीज उपचार + अच्छी ड्रेनेज
२. फली छेदक
सबसे विनाशकारी कीट।
Emamectin Benzoate: 0.4 gm/L
Ùee IndoxacaR: 0.6 ml/L
फेरोमोन ट्रैप लगाना बहुत मददगार।
३. झुलसा रोग
CaRendazim + Mancozeb
(2 + 2 gm/L)
फसल अवधि और पैदावार
देसी चना: ११०–१२० दिन
काबुली चना: १३०–१४० दिन
पैदावार
देसी: ८–१० क्विंटल/एकड़
काबुली: ६–८ क्विंटल/एकड़
लेट बुवाई में थोड़ा कम, लेकिन ७–८ क्विंटल यथार्थ लक्ष्य है।
लागत और मुनाफा
कुल लागत: ₹६,०००–₹१०,०००/acre
पैदावार मूल्य: ₹३०,०००–₹४५,०००/acre
नेट लाभ: ₹२०,०००–₹३०,०००/acre
काबुली का भाव ऊँचा है, लेकिन रिस्क भी ज्यादा। चना कम लागत में अच्छा मुनाफा दे सकता है, लेकिन यह ‘लापरवाही वाली फसल’ बिलकुल नहीं है। जड़ सड़न, फली छेदक और गलत सिंचाई—इन तीन गलतियों ने कई किसानों के खेत खाली करवाए हैं। अगर जमीन, पानी और किस्म का चुनाव समझदारी से किया जाए, और सल्फर व उब्ज्ेल्स् जैसी जरूरी चीजें नहीं छोड़ी जाएँ—तो लेट बुवाई में भी मजबूत पैदावार मिलती है।
चना का स्टोरेज (भंडारण) — बिल्कुल वास्तविक और जरूरी बातें
चना ऐसी फसल है जिसे बेचने की जल्दी मत करो, क्योंकि दाम हमेशा कटाई के समय गिरते हैं और ३–६ महीने बाद ऊपर जाते हैं। लेकिन इसके लिए स्टोरेज सही होना चाहिए, वरना कीट नुकसान करेगा। सही स्टोरेज में ६–१२ महीने तक आराम से सुरक्षित रहता है। अगर नमी ज्यादा हुई, या भंडारण ढीला हुआ तो १–२ महीने में ही कीड़े लग जाते हैं।
स्टोरेज की सबसे जरूरी बातें
(a) अनाज की नमी १०% से कम होनी चाहिए, ज्यादा नमी= फंगस, बदबू, रंग बदलना। कटाई के बाद ४–५ दिन धूप में सुखाना अनिवार्य।
(B) एयरटाइट स्टील//HDPE ड्रम
गुड़ाम में ढेर लगाकर मत छोड़ो—कीड़ा धावा बोल देगा। सबसे सुरक्षित विकल्प: धातु के ड्रम /HDPE एयरटाइट कंटेनर, प्लास्टिक लाइनिंग वाले बिन
(c ) भंडारण उपचार
Neem Oil Ùee Mustard Oil: 3–5 ml प्रति kg चना — १००% सुरक्षित और केमिकल-free, या Celphos टेबलेट (लेकिन यह सिर्फ़ गोडाउन उपयोग में लें, घर में नहीं)
(d) जूट बैग में भरकर सीधे फर्श पर मत रखो, नीचे लकड़ी का तख्ता या पैलेट होना चाहिए, वरना चना नमी खींच लेगा।
(e) महीने में एक बार निरीक्षण अनिवार्य
अगर कीट दिखे तो तुरंत धूप दिखाएँ या फ्यूमिगेशन करवा दें।
प्रॉफिट (लाभ)
कटाई के समय भाव (मार्च–अप्रैल):
देसी चना: ₹४,८००–₹५,५०० प्रति क्विंटल
काबुली चना: ₹७,०००–₹१०,००० प्रति क्विंटल ६ महीने बाद भाव (अगस्त–अक्टूबर): देसी: ₹६,०००–₹७,२०० प्रति क्विंटल काबुली: ₹१०,०००–₹१२,५०० प्रति क्विंटल, मतलब ₹१,०००–₹१,८०० प्रति क्विंटल का सीधा लाभ स्टोरेज से मिलता है। कई सालों में यह बढ़कर ₹२,०००–₹२,५०० प्रति क्विंटल भी हुआ है। चना की खेती खुद में मुनाफे वाली है। लेकिन असल पैसा स्टोरेज में है, तुरंत बेचने में नहीं। सही स्टोरेज से १२–१५ हजार प्रति एकड़ अतिरिक्त मिलना बिल्कुल सामान्य बात है। बस गलती मत करना—नमी, कीट और ओपन स्टोरेज तीनों चना बर्बाद कर देते हैं।
