तीन स्थानों से लिए गए पानी के नमूनों में निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण; सिंहस्थ कुंभ से पहले नदी की सफाई और सीवेज प्रबंधन पर बढ़ी निगरानी
महाराष्ट्र की प्रमुख नदियों में शामिल गोदावरी के प्रदूषण को लेकर नासिक महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। नासिक में गोदावरी प्रदूषण महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) ने नदी के पानी के नमूनों में निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण पाए जाने के बाद महानगरपालिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नगर निकाय से 15 दिनों के भीतर दस्तावेजों सहित लिखित जवाब मांगा गया है। नोटिस में यह भी पूछा गया है कि महानगरपालिका की बैंक गारंटी जब्त करने तथा सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से बिजली और पानी की आपूर्ति काटने की कार्रवाई क्यों न की जाए। यह प्रस्तावित कार्रवाई है, अंतिम निर्णय नहीं। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों ने 5 अक्टूबर को नदी के तीन स्थानों से पानी के नमूने एकत्र किए थे। इनमें तपोवन में गोदावरी और कपिला नदियों का संगम, दसक क्षेत्र में आगरा राजमार्ग के निकट नदी का हिस्सा तथा टाकली क्षेत्र शामिल हैं। नमूनों के विश्लेषण में प्रदूषण का स्तर निर्धारित पर्यावरणीय मानकों से अधिक पाया गया। इसके बाद नगर निकाय की सीवेज व्यवस्था और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया।
सीवेज प्रबंधन पर उठे सवाल
नासिक में गोदावरी प्रदूषण जल प्रदूषण रोकने के लिए शहर में उत्पन्न गंदे पानी का उचित संग्रह, उसका शोधन और सुरक्षित निपटान आवश्यक है। यदि बिना पर्याप्त उपचार के सीवेज नदी में पहुंचता है, तो पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने महानगरपालिका की जिम्मेदारियों पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में तीनों स्थानों के प्रदूषण के अलग-अलग आंकड़े और प्रदूषण के प्रत्येक स्रोत की विस्तृत तकनीकी जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए किसी एक नाले, संयंत्र या औद्योगिक इकाई को इन नमूनों के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
सिंहस्थ कुंभ से पहले बढ़ी चिंता
नासिक में वर्ष 2027 के सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के बीच गोदावरी की स्वच्छता का मुद्दा विशेष महत्व रखता है। नदी धार्मिक आस्था के साथ-साथ शहर की पर्यावरणीय पहचान का भी हिस्सा है। ऐसे में नदी की सफाई केवल किसी बड़े धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह सकती। नियमित सीवेज उपचार, नालों की निगरानी, औद्योगिक अपशिष्ट पर नियंत्रण और पानी की गुणवत्ता की सार्वजनिक रिपोर्टिंग जरूरी है।
नासिक में गोदावरी प्रदूषण नोटिस के बाद क्या होगा?
महानगरपालिका को निर्धारित अवधि में अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने हैं। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण मंडल जवाब की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकता है। इस बीच नदी में प्रदूषण रोकने के लिए सीवेज उपचार संयंत्रों की कार्यक्षमता, नालों से होने वाले बहाव और जल गुणवत्ता की नियमित जांच पर ध्यान देना आवश्यक होगा। गोदावरी को स्वच्छ बनाने की सफलता इस बात से तय होगी कि नोटिस और निरीक्षण के बाद जमीन पर कितने प्रभावी सुधार होते हैं। नागरिकों को भी यह जानने का अधिकार है कि नदी में प्रदूषण के स्रोत क्या हैं, जिम्मेदार एजेंसियां कौन-सी हैं और सुधार के लिए क्या समयसीमा तय की गई है। अब निगाहें महानगरपालिका के जवाब और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर हैं।
