दिवाली के अवसर पर वायु प्रदूषण कम करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से WWF-India ने देशव्यापी ‘ग्रीन दिवाली अभियान’ शुरू किया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से चलाया जा रहा यह अभियान 20 अक्टूबर से 8 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा। इसके तहत लोगों से पटाखों से दूर रहने और स्वच्छ, सुरक्षित तथा पर्यावरण-अनुकूल तरीके से दिवाली मनाने की अपील की गई है। यह पहल केंद्र सरकार के मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य दैनिक जीवन में पर्यावरण के अनुकूल आदतों को बढ़ावा देना है।
130 शहरों पर रहेगा विशेष ध्यान
इस अभियान के तहत देशभर के स्कूलों, कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों, आवासीय कल्याण संघों और स्थानीय समुदायों तक पहुंच बनाई जाएगी। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत शामिल 130 शहरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन शहरों में लोगों को वायु प्रदूषण कम करने, कचरे का उचित प्रबंधन करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक संगठनों को प्रार्थना सभाओं, कक्षाओं, रैलियों और सामुदायिक बैठकों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की सलाह दी गई है।
पटाखों के बजाय अपनाएं पर्यावरण-अनुकूल विकल्प
ग्रीन दिवाली अभियान के अंतर्गत नागरिकों से पटाखे न जलाने की शपथ लेने और अपने परिवार तथा पड़ोसियों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही पारंपरिक मिट्टी के दीयों और ऊर्जा-कुशल रोशनी का इस्तेमाल करने, एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक से बचने, कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में रखने और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। इन छोटे-छोटे कदमों से त्योहार के दौरान पैदा होने वाले कचरे को कम करने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है।
पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। तेज आवाज भी बच्चों, बुजुर्गों और पशु-पक्षियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। दिवाली के दौरान जब कई स्थानों पर पहले से ही वायु प्रदूषण की समस्या रहती है, तब पटाखों का सीमित या बिल्कुल इस्तेमाल न करना प्रदूषण के अतिरिक्त स्रोतों को कम करने में मददगार हो सकता है। हालांकि, प्रदूषण का स्तर मौसम, हवा की गति, स्थानीय उत्सर्जन और अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
लोगों से कार्बन फुटप्रिंट सर्वेक्षण में भाग लेने की अपील
अभियान के तहत WWF-India ने नागरिकों को कार्बन फुटप्रिंट सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। इसके माध्यम से लोग समझ सकते हैं कि उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां, ऊर्जा का उपयोग और खरीदारी की आदतें पर्यावरण पर किस तरह प्रभाव डालती हैं। अभियान में भाग लेने वाले स्कूलों, कॉलेजों, सामुदायिक समूहों और अन्य संस्थाओं से अपनी गतिविधियों का विवरण ऑनलाइन साझा करने का अनुरोध किया गया है। इसमें संस्था का नाम, स्थान, गतिविधि की तारीख, शपथ लेने वाले लोगों की संख्या, जियोटैग की गई तस्वीरें और संक्षिप्त रिपोर्ट शामिल की जा सकती है। चयनित गतिविधियों को संबंधित EIACP वेबसाइटों और सोशल मीडिया मंचों पर प्रदर्शित किया जा सकता है।
स्वच्छ दिवाली की जिम्मेदारी सभी की
दिवाली रोशनी, खुशियों और आपसी मेल-मिलाप का त्योहार है। पर्यावरण-अनुकूल तरीके से उत्सव मनाने का उद्देश्य त्योहार की खुशियों को कम करना नहीं, बल्कि उसके दौरान पर्यावरण पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव को घटाना है। मिट्टी के दीये जलाना, स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदना, प्लास्टिक की सजावट से बचना और कचरे का उचित निपटान करना ऐसे व्यावहारिक कदम हैं जिन्हें परिवार, विद्यालय और आवासीय सोसायटियां आसानी से अपना सकती हैं।
WWF-India का यह अभियान नागरिकों को याद दिलाता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। सामूहिक भागीदारी और दैनिक जीवन में छोटे बदलावों के जरिए स्वच्छ वातावरण की दिशा में योगदान दिया जा सकता है।
स्रोत: भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय https://www.pib.gov.in
