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July 18, 2026

महेश ट्यूटोरियल्स बंद: आखिर जिम्मेदार कौन? दो-दो साल की फीस भरने वाले हजारों छात्र और अभिभावक संकट में

महेश ट्यूटोरियल्स बंद (Mahesh Tutorials Closed)

मुंबई। महेश ट्यूटोरियल्स बंद होने से महाराष्ट्र के हजारों छात्रों और अभिभावकों का भविष्य दांव पर लग गया है। मुंबई और राज्यभर की 33 शाखाओं में अचानक शिक्षण कार्य रोक दिया गया है. मिली जानकारी के अनुसार, राज्यभर की 33 शाखाओं में अचानक शिक्षण कार्य रोक दिया गया है। सबसे बड़ी चिंता उन छात्रों और अभिभावकों की है, जिन्होंने पहले ही एक से दो वर्ष की एडवांस फीस जमा कर दी थी। अब न तो छात्रों को पढ़ाई मिल रही है और न ही फीस वापस मिलने की कोई स्पष्ट उम्मीद दिखाई दे रही है।

छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी

कई अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए लाखों रुपये की फीस जमा की थी। अचानक संस्थान बंद होने से बच्चों की पढ़ाई बीच में ही लटक गई है। विशेष रूप से बोर्ड परीक्षा (Board Exams) और प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) की तैयारी कर रहे छात्रों पर इसका सबसे गहरा और मानसिक असर पड़ा है।

दो साल की फीस पहले ही जमा

कुछ अभिभावकों का दावा है कि उन्होंने दो वर्षों की अग्रिम फीस पहले ही जमा कर दी थी। अब न तो कक्षाएं चल रही हैं और न ही फीस वापसी को लेकर कोई ठोस आश्वासन दिया गया है। इससे परिवारों की आर्थिक चिंता भी बढ़ गई है।

आखिर जिम्मेदारी किसकी?

इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • यदि किसी निजी शैक्षणिक संस्था को आर्थिक संकट था, तो छात्रों को पहले से जानकारी क्यों नहीं दी गई?
  • अग्रिम फीस लेने के बाद संस्थान बंद होने की स्थिति में छात्रों के हितों की रक्षा कौन करेगा?
  • क्या शिक्षा विभाग को ऐसी संस्थाओं की वित्तीय स्थिति पर नियमित निगरानी रखनी चाहिए?
  • फीस वापसी और छात्रों की आगे की पढ़ाई की जिम्मेदारी किसकी होगी?

दिवालियापन प्रक्रिया का असर

रिपोर्टों के अनुसार, संस्था वित्तीय संकट और दिवालियापन (Insolvency) की प्रक्रिया से गुजर रही है। इसी कारण सभी शाखाओं का संचालन रोक दिया गया है। संस्था की ओर से फीस लौटाने में असमर्थता भी जताई गई है, जिससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

अभिभावक सरकार और शिक्षा विभाग से मांग कर रहे हैं कि छात्रों का शैक्षणिक नुकसान न होने दिया जाए, उनकी जमा फीस की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि निजी कोचिंग संस्थानों के लिए अग्रिम फीस, वित्तीय पारदर्शिता और छात्र सुरक्षा को लेकर कड़े नियम बनाए जाने चाहिए।

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