ओणम उत्सव :केरल की सांस्कृतिक धरोहर…

ओणम का पर्व प्राचीन कथाओं से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह त्यौहार राजा महाबली की स्मृति में मनाया जाता है। राजा महाबली असुर वंश के थे, लेकिन उनकी शासन व्यवस्था न्यायप्रिय, सुखद और समृद्धिशाली मानी जाती थी। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा महाबली से तीन पग भूमि मांगी और उसके बाद उन्हें पाताल लोक भेज दिया। किंतु उनकी प्रजा के प्रति प्रेम देखकर भगवान ने उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने की अनुमति दी। उसी अवसर पर ओणम का त्योहार मनाया जाता है।

भारत विविधताओं का देश है, और यहाँ के हर राज्य की अपनी परंपराएँ और त्यौहार हैं। दक्षिण भारत के केरल राज्य का सबसे बड़ा और लोकप्रिय पर्व है ओणम, जिसे हर साल भव्य तरीके से मनाया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ओणम का समय
यह त्यौहार मलयालम कैलेंडर के चिंगम महीने में (अगस्त–सितंबर) मनाया जाता है।
यह १० दिनों तक चलता है और अंतिम दिन जिसे थिरुवोनम कहा जाता है, सबसे महत्वपूर्ण होता है।
ओणम के प्रमुख आकर्षण
पुकलम (फूलों की सजावट): घरों के आंगन में अलग-अलग फूलों से सुंदर डिज़ाइन बनाए जाते हैं।
ओणम साध्या: केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला पारंपरिक भोजन, जिसमें २५ से अधिक व्यंजन शामिल होते हैं।
वल्लम काली (नौका दौड़): लंबी नावों की भव्य दौड़ इस त्यौहार का विशेष आकर्षण है।
पुलिकली: कलाकार बाघ और शिकारी का रूप धरकर लोकनृत्य प्रस्तुत करते हैं।
कथकली और मोहिनीअट्टम: पारंपरिक नृत्य शैलियाँ इस पर्व पर विशेष रूप से प्रस्तुत की जाती हैं।
सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू
ओणम जाति, धर्म और वर्ग से परे सभी को जोड़ने वाला पर्व है। इस दिन अमीर-गरीब, हिंदू-मुस्लिम-ईसाई सभी लोग मिलकर उत्सव मनाते हैं। यह त्यौहार केरल की एकता और भाईचारे का प्रतीक है। ओणम केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। यह त्योहार लोगों को एक-दूसरे से जोड़ता है और जीवन में आनंद, सामूहिकता और उत्साह का संदेश देता है।

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