अयोध्या के राम मंदिर ( ram-mandir) में चढ़ावे की कथित चोरी और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर मंगलवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा और सदन में नारेबाजी की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण के दौरान भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। खबरों के अनुसार, मार्शलों को बीच-बचाव के लिए बुलाना पड़ा और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। लगातार हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी।
विपक्ष का आरोप है कि राम मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया और कहा कि तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में क्यों बढ़ा विवाद?
विधानसभा सत्र के दौरान विपक्षी सदस्यों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि आस्था के केंद्र राम मंदिर में चढ़ावे और दान के हिसाब-किताब में पारदर्शिता होना बेहद जरूरी है। विपक्ष ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।
सरकार का जवाब और पक्ष
सदन में हंगामा बढ़ता देख सत्तापक्ष की ओर से कहा गया कि विपक्ष बिना किसी ठोस सबूत के केवल मीडिया की सुर्खियों में रहने के लिए आधारहीन आरोप लगा रहा है। सरकार के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र निकाय है और मंदिर के दान व प्रबंधन का पूरा पारदर्शी ऑडिट किया जाता है। सरकार ने कहा कि धार्मिक मुद्दों पर इस तरह की राजनीति करना सही नहीं है।
सदन की कार्यवाही बाधित
सदन में हंगामे और लगातार नारेबाजी के कारण सामान्य कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। विधानसभा अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से शांति बनाए रखने और अपनी सीटों पर लौटने की अपील की, लेकिन स्थिति शांत न होने पर कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
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