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March 22, 2026

केरल के राज्यपाल: विकसित भारत का मार्ग विकसित ओडिशा से होकर गुजरता है

भुवनेश्वर, २९ नवंबर: ‘विकसित भारत: विकसित ओडिशा’ विषय पर आयोजित कलिंग टेलीविजन संगोष्ठी में राष्ट्रीय नेताओं, वरिष्ठ पत्रकारों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। देश के विकास-विजन और उसमें ओडिशा की बढ़ती भूमिका पर पूरे सत्र में गहन चर्चा हुई। ‘विकसित भारत का रास्ता विकसित ओडिशा से होकर जाता है’—केरल के राज्यपाल केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने कहा कि कीट और कीस का दौरा उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा। उन्होंने इन्हें ‘विकसित ओडिशा के मानक’ बताया।
उन्होंने कहा,‘प्रधानमंत्री ने हमें विकसित भारत का सपना दिया है। पर यह मेरे लिए क्या मायने रखता है? मैं इसमें कैसे योगदान दूँ? जब तक हम इसका उत्तर नहीं देंगे, हम सिर्फ दर्शक बने रहेंगे। हमें नौकरी खोजने की मानसिकता से निकलकर नौकरी देने वाले बनना होगा।’ स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, ‘क्या मैं स्वदेशी अपना सकता हूँ? क्या मैं आयातित वस्तुओं का उपयोग कम करके राष्ट्रनिर्माण में व्यक्तिगत योगदान दे सकता हूँ?’
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि भारत की प्रगति ओडिशा के विकास से जुड़ी है। उन्होंने कहा, ‘भारत का विकास तभी होगा जब ओडिशा विकसित होगा।’ उन्होंने भरोसा जताया कि वर्तमान डबल-इंजन सरकार के तहत राज्य के सपने साकार होंगे। उन्होंने सरकार के लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए बताया: २०३६ तक ओडिशा के लिए ५०० मिलियन (५० करोड़) लक्ष्य, प्रति व्यक्ति आय में सुधार, बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश। उन्होंने बताया कि राज्य को १६ लाख करोड़ रुपये के औद्योगिक इरादे (industrial intents) प्राप्त हुए हैं, जिनमें से ३०–३२% परियोजनाएँ पहले ही ज़मीन पर उतर चुकी हैं। उन्होंने आगे कहा कि ओडिशा लखपति दीदी पंजीकरण में देश में अग्रणी है। नई सरकार के कार्यकाल में ३८,००० सरकारी और ४८,००० निजी क्षेत्र में नौकरियाँ दी गई हैं। उन्होंने विश्वास जताया, ‘हम निर्धारित समय में विकसित ओडिशा के लक्ष्य को हासिल करेंगे।’
कन्नड़ प्रभा के प्रधान संपादक रवि हेगड़े ने कहा कि ओडिशा की छवि में असाधारण बदलाव आया है। ‘पहले हम ओडिशा को सिर्फ मंदिरों और संस्कृति से जोड़ते थे। यह अब पिछड़ा राज्य नहीं है। भुवनेश्वर की सड़कें देखकर तो लगता है कि पिछड़ा कौन—भुवनेश्वर या बेंगलुरु?’ उन्होंने ओडिशा के विश्वस्तरीय स्टील और एल्युमिनियम सेक्टर, प्रगतिशील सामाजिक कार्यक्रमों और विकास के साथ पहचान को सुरक्षित रखने की विशेष सराहना की। ‘विकसित भारत वही है जहाँ राज्य आर्थिक रूप से मजबूत और वैश्विक स्तर पर सम्मानित हों। वास्तविक विकास तब होगा जब हर गाँव तक प्रगति पहुँचे।’ उन्होंने डॉ. अच्युत सामंत को ‘विकसित भारत के श्रेष्ठ उदाहरणों में से एक’ बताते हुए कीट और कीस को समावेशी एवं आत्मनिर्भर विकास के मॉडल कहा।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के एडिटोरियल डायरेक्टर प्रभु चावला ने ओडिशा के परिवर्तन और बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा,‘ओडिशा अब पिछड़ा राज्य नहीं है, न ही सिर्फ कालाहांडी की पहचान रखने वाला राज्य। न्यू इंडियन एक्सप्रेस भी ओडिशा के साथ बढ़ा है।’ उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा:७–८% GDP वृद्धि, ४० वर्षों में सबसे अधिक विदेशी मुद्रा भंडार, UPI जैसी डिजिटल व्यवस्था का ८५% से अधिक उपयोग,ये सभी विकसित भारत की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा,‘वास्तविक विकास घर, स्कूल और अस्पताल से शुरू होता है। साहित्य और बौद्धिक धरोहर ओडिशा की ताकत है। डबल-इंजन सरकार के साथ राज्य और आगे बढ़ सकता है।’ उन्होंने जोड़ा, ‘जब तक हर राज्य प्रगति नहीं करेगा, भारत पूरी तरह विकसित नहीं हो सकता।’
बीजेडी नेता देबी प्रसाद मिश्रा ने भी कार्यक्रम में वक्तव्य दिया और पिछले शासनकाल की पहलों तथा ओडिशा की दीर्घकालिक विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। हर राज्य के साथ आगे बढ़ेगा भारत आयोजित संगोष्ठी एक मजबूत संदेश के साथ समाप्त हुई। कार्यक्रम में कीट और कीस के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत ने सभी वक्ताओं का परिचय कराया और विशेषकर केरल के राज्यपाल का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने कीट और कीस का दौरा किया और इस सम्मेलन में भाग लिया। इस कार्यक्रम की मेजबानी एक AI-जनित एंकर ने की, जिसने उपस्थित सभी लोगों का विशेष ध्यान और प्रशंसा आकर्षित की। आयोजित संगोष्ठी सभी के लिए लाभप्रद रही।

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