आईटी सेक्टर का संकट:

टीसीएस में छंटनी और कर्मचारियों की चुनौती

टीसीएस की छंटनी केवल एक कंपनी का निर्णय नहीं, बल्कि पूरे आईटी सेक्टर की दिशा बदलने का संकेत है। जहाँ एक ओर कंपनियाँ लागत घटाने और ऑटोमेशन पर भरोसा कर रही हैं, वहीं कर्मचारियों को अब अपनी योग्यता और कौशल को निरंतर निखारते रहना होगा। स्थिरता अब अनुभव पर नहीं, बल्कि नवाचार और अनुकूलनशीलता पर निर्भर करेगी

भारत की आईटी कंपनियाँ लंबे समय तक स्थिर रोजगार और आकर्षक वेतन पैकेज का प्रतीक मानी जाती रही हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) जैसे दिग्गजों ने लाखों युवाओं को करियर का सपना दिया। लेकिन हाल ही में जब टीसीएस ने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की कटौती शुरू की, तो इसने पूरे आईटी उद्योग की सुरक्षित छवि पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए।

कर्मचारियों की भरपाई 

नोटिस पीरियड वेतन – जिन कर्मचारियों को तुरंत नौकरी छोड़नी पड़ी, उन्हें १–३ महीने का वेतन अतिरिक्त दिया जा रहा है।

सेवरेन्स पैकेज – नौकरी की अवधि के आधार पर कुछ अतिरिक्त भुगतान।

झ्इ और ग्रेच्युटी – लंबे समय तक काम करने वालों को कानूनी रूप से इसका लाभ मिल रहा है।

हेल्थ इंश्योरेंस – कुछ समय तक कंपनी प्रायोजित मेडिकल सुविधाएँ जारी रहती हैं।

हालाँकि, भारत में यह पैकेज पश्चिमी देशों जितना उदार नहीं होता। कर्मचारियों को लंबी अवधि तक सहारा देने वाला कोई ठोस तंत्र अभी भी नहीं है।

छंटनी के कारण

वैश्विक मंदी – अमेरिका और यूरोप में खर्च कम होने से नए प्रोजेक्ट घटे।

ऑटोमेशन और एआई – जिन कामों के लिए पहले बड़ी टीम चाहिए थी, अब मशीन और सॉफ्टवेयर से निपट रहे हैं।

लागत कम करने की रणनीति – कंपनियाँ ‘बेंच पर बैठे’ यानी प्रोजेक्ट-रहित कर्मचारियों को हटाकर खर्च घटा रही हैं।

बिज़नेस मॉडल का बदलाव – आउटसोर्सिंग से हटकर अब क्लाउड, एआई और डिजिटल ट्रांसफ़ॉर्मेशन पर ध्यान है, जिसके लिए अलग कौशल चाहिए।

भारत सरकार आईटी सेक्टर को देश की अर्थव्यवस्था का आधार मानती है। इसलिए: कौशल विकास योजनाएँ शुरू की गई हैं ताकि कर्मचारी नई तकनीकों (AI, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी) में प्रशिक्षित हो सकें। स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों के ज़रिए युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। लेकिन छंटनी नियमन को लेकर अभी भी स्पष्ट कानून नहीं है, जिससे कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा अधूरी है। कुछ आईटी यूनियनें यह मांग कर रही हैं कि छंटनी से पहले कर्मचारियों को री-स्किलिंग का अवसर दिया जाए। न्यूनतम सेवरेन्स पैकेज को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाए। अचानक नौकरी से निकालने की बजाय ट्रांज़िशन पीरियड दिया जाए।

इस संकट से एक बड़ा संदेश मिलता है नई तकनीक सीखना अनिवार्य है: क्लाउड, एआई, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, और साइबर सिक्योरिटी में कौशल हासिल करना ही भविष्य सुरक्षित करेगा। कई आईटी प्रोफेशनल अब खुद छोटे टेक-उद्यम शुरू कर रहे हैं। वैश्विक प्लेटफ़ॉर्म्स पर काम करने का विकल्प बढ़ रहा है।

टीसीएस की छंटनी केवल एक कंपनी का निर्णय नहीं, बल्कि पूरे आईटी सेक्टर की दिशा बदलने का संकेत है। जहाँ एक ओर कंपनियाँ लागत घटाने और ऑटोमेशन पर भरोसा कर रही हैं, वहीं कर्मचारियों को अब अपनी योग्यता और कौशल को निरंतर निखारते रहना होगा। स्थिरता अब अनुभव पर नहीं, बल्कि नवाचार और अनुकूलनशीलता पर निर्भर करेगी।

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