Maharashtra Political Crisis: 25 साल बाद अब एनसीपी के कांग्रेस में विलय की खबर…

सियासी गलियारों में शरद पवार गुट की एनसीपी के कांग्रेस में विलय की चर्चा जोरों पर है. 25 साल बाद अब एनसीपी के कांग्रेस में विलय की खबर सूत्रों के अनुसार, दावा किया जा रहा है कि शरद पवार ने अपने विधायकों और सांसदों की पुणे में तत्काल बैठक बुलाई है. इस बैठक में बड़ा निर्णय लेने की संभावना बताई जा रही है. हालांकि, अभी तक कांग्रेस या शरद पवार के गुट की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है. बता दें कि 25 साल पहले शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होने के बाद साल 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना की थी. 

Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है,  25 साल बाद अब एनसीपी के कांग्रेस में विलय की खबर... कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी गुट का विलय हो सकता है। इसे कांग्रेस की सियासत का भी एक  बड़ा घटनाक्रम माना जा सकता है। करीब ढाई दशक की सियासी सफर के बाद पवार गुट जिसके प्रमुख शरद पवार हैं उनके कांग्रेस में अपनी पार्टी के विलय करने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के हवाले से ये खबर सामने आ रही है। 1999 में विदेशी मूल का मुद्दा उठाकर उन्होंने सोनिया गांधी के विरोध में कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। फिर एनसीपी नाम से अपनी पार्टी बनाई थी। इसके 25 साल बाद अब एनसीपी के कांग्रेस में विलय की खबर सामने आ रही है। अपने विधायकों और सांसदों से शरद पवार बातचीत करना चाहते थे। उन्होंने बैठक बुलाई। शरद पवार गुट के मंगलदास बंडल ने विलय को लेकर बातचीत की बात कही है। शरद पवार राज्यसभा को लेकर भी इस तरह के कदम उठा सकते हैं। जिस तरह से कांग्रेस में बगावत होने की बात कही जा रही है। कांग्रेस को राज्यसभा में अपना उम्मीदवार भेजना है। जिसमें शरद पवार की मदद ली जा सकती है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्नईथला और शरद पवार की इससे पहले बैठक भी हो चुकी है। 

शरद पवार और एनसीपी का सफर

शरद पवार के राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 1956 में छात्र नेता के रूप में की थी. इसके बाद 1958 में युवा कांग्रेस में शामिल हो गए. लेकिन, इंदिरा गांधी के आपातकाल के फैसले से नाराज होकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने जनता पार्टी के सहयोग से महाराष्ट्र में सरकार का गठन कर लिया और खुद सीएम की कुर्सी पर बैठ गए. हालांकि, साल 1980 में इंदिरा गांधी ने सरकार में वापसी की और महाराष्ट्र में पवार सरकार को बर्खास्त कर दिया गया. इसके बाद साल 1983 में शरद पवार ने ‘कांग्रेस पार्टी सोशलिस्ट’ नाम से एक नए दल का गठन किया. साल 1987 में राजीव गांधी ने शरद पवार की कांग्रेस में वापसी कराई और उन्हें महाराष्ट्र के तत्कालीन सीएम रहे शंकर राव चव्हाण की जगह मुख्यमंत्री बनाया गया. 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद शरद पवार के पीएम बनने की चर्चा थी, लेकिन नरसिम्हा राव को मौका मिला. साल 1998 आते-आते शरद पवार ने सोनिया गांधी के कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिया, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया. इसके बाद साल 1999 में उन्होंने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) का गठन किया. हालांकि, जुलाई 2023 में शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने बगावत की और कुछ विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए. इसके बाद एनसीपी दो फाड़ में हो गई और तब से इसको लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है.

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