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February 5, 2026

BMC चुनाव २०२६…

मुंबई नगर निगम के गढ़ को कौन जीतेगा?

एशिया के सबसे अमीर मुंबई नगर निगम के गढ़ को कौन फतह करेगा यह सबसे ज्यादा उत्सुकता देश का ध्यान मुंबई नगर निगम चुनाव पर है। BMC चुनाव २०२६… इस बात की प्रबल संभावना है कि यह चुनाव चतुष्कोणीय होगा। नगर निगम चुनाव को लेकर सभी दलों के बीच होड़ मची हुई है। मनसे-उद्धव सेना और भाजपा-शिंदे सेना के बीच खींचतान अब शुरू होगी। जब दोनों तरफ प्रचार की तोपें धधक रही होंगी, तो आग की लपटें बाहर आ जाएंगी। नामांकन पत्र भरने के समय तक राज्य में काफी भ्रम की स्थिति थी। कई टिकट कटने के कारण बड़ा हंगामा हुआ। पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। मुंबई में कुल २,५१६ उम्मीदवार मैदान में हैं। अब नगर निगम के गढ़ को कौन जीतेगा इसका खुलासा १६ जनवरी, २०२६ को होगा। बीएमसी के लिए कुल २,५१६ उम्मीदवार मैदान में हैं। तो इस मुकाबले में कौन जीतेगा इसका खुलासा जल्द ही किया जाएगा।
चुनाव लड़ने के लिए बीएमसी की ओर से कुल ११,३९१ नामांकन पत्र वितरित किए गए थे। सबसे अधिक १८२ उम्मीदवार मैदान में हैं। सबसे कम संख्या में आवेदन सेंट्रल डिवीजन से वितरित किए गए थे। इस सीट पर कुल ५१ उम्मीदवार मैदान में हैं। कई लोग इस बात पर भी ध्यान दे रहे हैं कि किसका आवेदन खारिज हो गया है। इस बात की भी जांच और चर्चा की जा रही है कि बगावत को रोकने के लिए नामांकन कौन वापस लेता है।
अमरावती नगर निगम में ८७ पार्षदों के चुनाव के लिए १०२१ उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। कल कुल ७१५ नामांकन पत्र भरे गए थे। अमरावती नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के अंतिम दिन कल ७१५ उम् मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए। अब तक १०२१ उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। २२ वार्डों में ८७ सदस्यों के चुनाव के लिए १५ जनवरी को मतदान होगा और मतगणना १६ जनवरी को होगी।
अमरावती नगर निगम (एएमसी) प्रशासन ने नामांकन दाखिल करने के लिए सात स्थानों पर व्यवस्था की थी। २०१७ में बीजेपी ने ४५ सीटें जीती थीं. कांग्रेस ने पिछली बार १५ पार्षदों को जीता था। उनमें से पांच को टिकट देने से इनकार कर दिया गया था। कांग्रेस ने इस साल ६५ नए चेहरों को मैदान में उतारा है।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी, शिवसेना शिंदे गुट, शिवसेना यूबीटी, राज ठाकरे की मनसे और एनसीपी के शरद पवार और अजित पवार गुट भी मैदान में हैं. मुंबई में मराठी, उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोटर निर्णायक स्थिति में हैं. आइए जानते हैं पूरा समीकरण। बृहन्मुंबई नगर निगम BMC चुनाव में २२७ सीटों की लड़ाई काफी प्रतिष्ठापूर्ण हो गई हैै। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना के लिए ये करो या मरो का सवाल है, जिन पर ठाकरे परिवार की सियासत का आखिरी गढ़ बचाने की चुनौती हैै। शिवसेना यूबीटी ने इस बार अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ गठबंधन किया हैै। जबकि बीजेपी शिवसेना शिंदे गुट के साथ गठजोड़ कर चुनाव में उतरी हैै। BMC के २२७ निर्वाचन वार्ड में मराठी, उत्तर भारतीय, मुस्लिम, गुजराती-मारवाड़ी मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है, बाकी अन्य समुदाय के वोटर हैंै। बीएमसी चुनाव २०१७ में चुने गए २२७ नगरसेवकों में करीब १५०-१५५ नगरसेवक मराठी भाषी थेै। जबकि ७२ से ७६ नगरसेवक गैर मराठी यानी गुजराती, उत्तर भारतीय, मुस्लिम थेै। शिवसेना के दोनों धड़ों और मनसे का फोकस मराठी मानुष पर है, जबकि बीजेपी मराठी और गैर मराठी दोनों पर ध्यान दे रही हैै।

BMC का चुनाव “पार्टी” नहीं, पहचान + वार्ड-स्तरीय नेटवर्क का चुनाव है

जो इसे सिर्फ़ राज्य या लोकसभा की तरह देख रहा है, वो ग़लत है।
BMC में जीत तय होती है:

  • वार्ड के ठेके
  • झुग्गी-पुनर्विकास
  • पानी-नाला-कचरा
  • स्थानीय नेता की पकड़

2️⃣ वोटर ब्लॉक्स: असली खेल यहीं है

🔹 (A) मराठी वोटर (लगभग 35–40%)

सबसे ज़्यादा बिखरा हुआ, इसलिए सबसे निर्णायक।

  • शिवसेना (UBT)
    • भावनात्मक पकड़ अब भी है
    • “असली शिवसेना” नैरेटिव
    • लेकिन: संगठन कमजोर, फंड और सत्ता नहीं
  • शिवसेना (शिंदे)
    • सत्ता, पैसा, ठेकेदार नेटवर्क
    • लेकिन: ग्रासरूट में भरोसे की कमी
    • मराठी अस्मिता पर पकड़ उधार की है
  • मनसे (राज ठाकरे)
    • शुद्ध मराठी वोट काटने की मशीन
    • जीत कम, हार तय करवाने की क्षमता ज़्यादा
    • अगर 8–10% वोट भी ले गए, तो UBT और शिंदे दोनों को नुकसान

🔹 (B) उत्तर भारतीय वोटर (20–25%)

सबसे ज़्यादा संगठित और व्यवहारिक वोट।

  • झुकाव साफ़ तौर पर बीजेपी + शिंदे गुट की ओर
  • कारण:
    • केंद्र + राज्य सत्ता
    • हिंदी भाषी नेतृत्व
    • लॉ-एंड-ऑर्डर, राष्ट्रवाद का नैरेटिव

👉 ये वोट भावुक नहीं, पावर देखता है
👉 BJP का सबसे स्थिर वोट बैंक

🔹 (C) मुस्लिम वोटर (12–15%)

पूरा का पूरा एंटी-बीजेपी वोट।

  • झुकाव:
    • शिवसेना (UBT)
    • NCP (शरद पवार)
    • कांग्रेस (अगर मैदान में असरदार रही)
  • बंटवारा तभी होगा जब:
    • उम्मीदवार कमजोर हो
    • स्थानीय स्तर पर सौदेबाज़ी हो

👉 मुस्लिम वोट एकजुट रहता है, लेकिन जीत दिलाने के लिए उसे मराठी या उत्तर भारतीय वोट का साथ चाहिए

3️⃣ पार्टियों की वास्तविक ताक़त और कमजोरी

🟠 BJP

ताक़त

  • पैसा
  • मशीनरी
  • उत्तर भारतीय वोट
  • शिंदे गुट का सहारा

कमजोरी

  • BMC में खुद का कैडर आज भी सीमित
  • मराठी अस्मिता में भरोसा नहीं

👉 BJP अकेले नहीं जीतती, साझेदार से जीतती है

🟡 शिवसेना (शिंदे)

ताक़त

  • सत्ता
  • प्रशासनिक पकड़
  • पार्षद तोड़ने का रिकॉर्ड

कमजोरी

  • जनता में वैधता का सवाल
  • मराठी भावनात्मक जुड़ाव कमजोर

🔴 शिवसेना (UBT)

ताक़त

  • ब्रांड
  • मराठी + मुस्लिम कॉम्बो
  • सहानुभूति फैक्टर

कमजोरी

  • पैसा नहीं
  • सत्ता नहीं
  • ज़मीनी संगठन कमजोर

👉 अगर मनसे अलग नहीं रही, तो UBT को भारी नुकसान

🔵 मनसे

ताक़त

  • मराठी हार्डलाइन
  • शहरी युवा

हक़ीक़त

  • जीतने की नहीं, खेल बिगाड़ने की पार्टी

🟢 NCP (शरद पवार)

  • मुस्लिम + मराठी सेक्युलर वोट
  • सीमित वार्डों में असर

👉 खुद नहीं जीतेगी, किसी को जिताने या हराने में रोल

🟣 NCP (अजित पवार)

  • BJP-शिंदे की B-team
  • कुछ इलाकों में फंड का असर

👉 अकेले कोई गेम-चेंजर नहीं

4️⃣ संभावित परिदृश्य (Ground Reality)

🔹 Scenario 1: BJP + Shinde + Ajit

  • उत्तर भारतीय + सत्ता + पैसा
  • सबसे मजबूत गठबंधन

🔹 Scenario 2: UBT + Sharad Pawar + Congress

  • मराठी + मुस्लिम
  • लेकिन: मनसे अलग रही तो नुकसान तय

🔹 Scenario 3: मनसे का आक्रामक खेल

  • 30–40 सीटों पर सीधा नुकसान
  • फायदा सीधे BJP-Shinde को

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