देश का आठ बार ‘सबसे स्वच्छ शहर’ रह चुका इंदौर इन दिनों जलजनित बीमारी के गंभीर खतरे से जूझ रहा है। इंदौर की ‘स्वच्छता’ पर दाग, भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैले डायरिया के प्रकोप ने अब तक आठ लोगों की जान ले ली है, जबकि 1400 से अधिक लोग बीमार पाए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि पेयजल की सप्लाई में सीवेज का मिश्रण होने से यह संक्रमण फैला। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि शहर के मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके में पानी की पाइपलाइन लीक होने से गंदा पानी पेयजल में मिल गया। रिसाव उस स्थान पर पाया गया, जहां एक शौचालय बना हुआ है। फिलहाल मरम्मत कार्य के बाद पानी की आपूर्ति बहाल की गई है, लेकिन नागरिकों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर दुबे ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गुरुवार को 1714 परिवारों में 8571 लोगों की जांच की गई, जिनमें 338 लोगों में उल्टी-डायरिया जैसे हल्के लक्षण पाए गए। इनका प्राथमिक इलाज घर पर ही किया गया।

अब तक 272 मरीज अस्पतालों में भर्ती
अब तक 272 मरीज अस्पतालों में भर्ती किए गए हैं, जिनमें से 71 को छुट्टी दी जा चुकी है। वर्तमान में 201 मरीजों का इलाज जारी है, जिनमें 32 की हालत गंभीर है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना ने ‘इंदौर मॉडल’ की स्वच्छता प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वच्छता की रैंकिंग से आगे बढ़कर जल स्रोतों की नियमित जांच और पाइपलाइन सुरक्षा पर ध्यान देना अब जरूरी हो गया है।

