ताजा खबरें
February 4, 2026

केंद्रीय बजट 2026-27

वित्त मंत्री ने कहा कि माघ पूर्णिमा के पवित्र अवसर और गुरु रविदास की जन्म जयंती के मौके पर कर्तव्य भवन में तैयार हुआ केंद्रीय बजट 2026-27, यह पहला बजट 3 कर्तव्यों से प्रेरित हैः

पहला कर्तव्य है- उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाते हुए तथा उथल-पुथल भरी वैश्विक स्थिति के प्रति सहनीयता का निर्माण करके आर्थिक वृद्धि को तेज करना तथा इसे बनाए रखना ।

दूसरा कर्तव्य है- लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनके क्षमता का निर्माण करना; भारत की समृद्धि के मार्ग में उन्हें मजबूत भागीदार बनाना।

तीसरा कर्तव्य सबका साथ-सबका विकास के विज़न से जुड़ा है। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र के पास संसाधनों, सुविधाओं तथा सार्थक भागीदारी के लिए अवसरों तक पहुंच की सुविधा हो।

युवा शक्ति संचालित बजट, जो गरीब, शोषित और वंचित समुदायों के प्रति सरकार के संकल्प पर जोर देता है, पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश विकसित भारत हासिल करने की दिशा में विश्वास से भरे कदम उठाता रहेगा, समावेश के साथ महत्वाकांक्षा का संतुलन करेगा। बढ़ते व्यापार और पूंजी की जरूरतों के साथ एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में भारत को वैश्विक बाजारों के साथ मजबूती से एकीकृत होना चाहिए, निर्यात में वृद्धि करनी चाहिए तथा लम्बी अवधि के स्थिर निवेश को आकर्षित करना चाहिए।

उन्होंने उल्लेख किया कि देश बाहरी वातावरण का सामना कर रहा है, जिसमें व्यापार और बहु-पक्षवाद को नुकसान हुआ है तथा संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच में बाधाएं आई है। नई तकनीकें निर्माण प्रणालियों में बदलाव ला रही है, जबकि जल, ऊर्जा तथा महत्वपूर्ण खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद, 350 से ज्यादा सुधारों की शुरूआत की गई है। इनमें जीएसटी सरलीकरण, श्रम संहिताओं की अधिसूचना, अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का युक्तिकरण शामिल है। उच्च स्तरीय समितियां गठित की गई है और इसके साथ नियम समाप्त करने तथा अनिपालन जरूरतों को कम करने के लिए केन्द्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है।

पहला कर्तव्य आर्थिक वृद्धि को तेज करना व बनाए रखना है। पहले कर्तव्य के तहत छह क्षेत्रों में हस्तक्षेप कार्यक्रमों का प्रस्ताव दिया गया है।

  1. 7 रणनीतिक और सीमा क्षेत्रों में विनिर्माण का विस्तार करना
  2. विरासत औद्योगिक क्षेत्रों का पुनर्निर्माण करना
  3. चैम्पियन एमएसएमई बनाना
  4. अवसंरचना पर सशक्त बल देना
  5. लम्बी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को सुनिश्चित करना
  6. नगर आर्थिक क्षेत्र विकसित करना

वैश्विक बायोफॉर्मा निर्माण केन्द्र के रूप में भारत को विकसित करने के लिए बायोफॉर्मा शक्ति, जिसका कुल परिव्यय 10,000 करोड़ रुपये है, बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए अगले पांच वर्षों में इको-सिस्टम का निर्माण करेगी। रणनीति में शामिल है- तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) और सात वर्तमान संस्थानों के उन्नयन के साथ बायोफॉर्मा पर केन्द्रित नेटवर्क। यह 1000 मान्यता प्राप्त भारत क्लिनिक जांच स्थलों के एक नेटवर्क का निर्माण करेगा। वैश्विक मानक हासिल करने तथा एक समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा कैडर व विशेषज्ञों के माध्यम से समयावधि मंजूर करने के लिए केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को मजबूत किया जाएगा।

श्रम गहन वस्त्र क्षेत्र के लिए, पांच उपभागों के साथ एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्ताव किया गया हैः

रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मानव निर्मित फाइबर और नए युग के फाइबरों में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना; मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और सामान्य परीक्षण एवं प्रमाणन केन्द्रों के लिए पूंजीगत सहायता के साथ पारम्परिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना; मौजूदा योजनाओं को एकीकृत एवं सुदृढ़ करने और बुनकरों एवं कारीगरों के लिए लक्षित सहायता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम; वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ वस्त्र और परिधानों को बढ़ावा देने के लिए टेक्स-इको पहल; उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से वस्त्र कौशल इको-सिस्टम के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए समर्थ 2.0 ।

विकास के प्रमुख इंजन के रूप में एमएसएमई को मान्यता देते हुए, 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास निधि का प्रस्ताव दिया गया है ताकि भविष्य के चैम्पियनों का निर्माण किया जा सके और निर्धारित विशेषताओं के आधार पर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा सके।

वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में गुणात्मक वृद्धि हुई है जो वित्त वर्ष 2014-15 के 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर बीई 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि इस गति को बनाए रखने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा।

कार्गो के पर्यावरण रूप से टिकाऊ आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने नए समर्पित फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव दिया, जो पूर्व में दानकुनी को पश्चिम के सूरत से जोड़ेगा; अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों (एनडब्ल्यू) का संचालन प्रारंभ होगा। इसकी शुरूआत ओड़िशा में एनडब्ल्यू 5 से की जाएगी, जो खनिज की प्रचुरता वाले क्षेत्र तालचर और अंगुल व कलिंग नगर जैसै औद्योगिक केन्द्र को पारादीप और घामरा पत्तनों से जोड़ेगा। आवश्यक कार्यबल के विकास के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के रुप में प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की जाएगी।

इस बजट का लक्ष्य शहरी आर्थिक क्षेत्रों के विशिष्ट विकास कारकों के आधार पर, शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) का मानचित्रण करके समूहों की आर्थिक स्थिति का उपयोग करने के लिए शहरों की क्षमता को और अधिक बढ़ाना है। सुधार-सह-परिणाम आधारित वित्तपोषण तंत्र से चुनौती मोड के माध्यम से उनकी योजनाओं को लागू करने में प्रति सीईआर 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन का प्रस्ताव दिया गया है।

पर्यावरणीय रूप से सतत् यात्री प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए, हम शहरों के बीच विकास संयोजक के रूप में सात उच्च-गति रेल कॉरीडोर विकसित किए जाएंगे-

  1. मुंबई-पुणे
  2. पुणे-हैदराबाद
  3. हैदराबाद-बेंगलुरु
  4. हैदराबाद-चेन्नई
  5. चेन्नई-बेंगलुरु
  6. दिल्ली-वाराणसी
  7. वाराणसी-सिलीगुड़ी।

वित्त मंत्री ने कहा कि दूसरा कर्तव्य आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षमता निर्माण करना है। सरकार के सतत् और सुधार उन्मुख प्रयासों के जरिए 25 करोड़ व्यक्ति गरीबी की रेखा से ऊपर उठ गए है।

चिकित्सा पर्यटन सेवाओं के लिए भारत को एक वैश्वक केन्द्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने राज्यों को सहायता देने के लिए एक योजना का प्रस्ताव दिया, जिसके तहत राज्य निजी क्षेत्र के सहयोग से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केन्द्र स्थापित कर सकते है। यह केन्द्र एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल भवन के रूप में कार्य करेंगे, जिनमें चिकित्सा, शिक्षा और शोध करने की सुविधाएं मौजूद होगी। इन केन्द्रों में आयुष केन्द्र, चिकित्सा केन्द्र, पर्यटन केन्द्र एवं स्वास्थ्य जांच, बाद के देखभाल और पुनर्वास की अवसंरचना होंगी। यह केन्द्र डॉक्टर और एएचपी के साथ-साथ स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए विभिन्न नौकरियों का विकल्प प्रस्तुत करेगे।

पशु चिकित्सा पेशेवरों की संख्या 20,000 तक करने के लिए ऋण से जुड़े पूंजीगत सब्सिडी का प्रस्ताव दिया गया है ताकि निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा और पारावेट कॉलेज, वेटेनरी, पशु चिकित्सालय, जांच प्रयोगशाला, प्रजनन सुविधा की स्थापना के लिए समर्थन दिया जा सके।

भारत का एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र एक बढ़ता हुआ उद्योग है। अनुमान है कि 2030 तक इस क्षेत्र में 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी। वित्त मंत्री ने भारतीय रचना प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई को समर्थन देने का प्रस्ताव दिया, ताकि संस्थान 15,000 उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेट निर्माण लैब की स्थापना कर सके।

उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में अध्ययन और प्रयोगशाला कार्य की लम्बी अवधि छात्राओं के लिए चुनौती पैदा करती है। वीजीएफ/पूंजीगत समर्थन के जरिए प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास की स्थापना की जाएगी।

वित्त मंत्री ने वर्तमान के राष्ट्रीय होटल प्रबंधन और केटररिंग प्रौद्योगिकी परिषद का उन्नयन करके राष्ट्रिय आतिथ्य संस्थान की स्थापना करने का प्रस्ताव रखा। यह शिक्षा जगत, उद्योग जगत और सरकार के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने आगे 20 पर्यटनों स्थलों में 10,000 गाइडों के कौशल का उन्नयन करने के लिए एक पायलट योजना का प्रस्ताव रखा। इसके लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान के साथ साझेदारी में हाईब्रिड मोड में 12 सप्ताह के एक मानक उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के जरिए गाइडों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

खेलो इंडिया कार्यक्रम के जरिए खेल प्रतिभाओं को मार्गदर्शन व सहायता प्रदान करने के कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए वित्त मंत्री ने अगले दशक में खेल क्षेत्र को परिवर्तित करने के लिए खेलो इंडिया मिशन के शुभारंभ का प्रस्ताव रखा।। यह मिशन निम्न सुविधाएं प्रदान करेगा। क.) प्रशिक्षण केन्द्रों के समर्थन से प्रतिभा विकास के लिए एकीकृत तरीका ख.) कोच और सहायककर्मियों का प्रणालीगत विकास ग.) खेल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकीकरण घ.) खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा मंच प्रदान करने के लिए प्रतियोगिताएं और लीग ड.) प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए खेल अवसंरचना का विकास।

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट का तीसरा कर्तव्‍य जो सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है, यह सुनिश्चित करता है कि किसानों की आय में वृद्धि हो, दिव्‍यांगजन सशक्‍त बनें, मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कमजोर समूहों का सशक्तिकरण हो,  विकास और रोजगार के अवसरों में तेजी लाकर पूर्वोदय राज्‍यों और पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर ध्‍यान केंद्रित हो।

वित्त मंत्री ने एक भाषीय टूल – भारत विस्‍तार (कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए वर्चुअल एकीकृत प्रणाली)  – का प्रस्‍ताव किया जो एक बहुभाषीय एआई टूल है और जिसे एआई प्रणाली सहित कृषि संबंधी प्रणालियों के लिए आईसीएआर पैकेज सहित एग्रीस्‍टैक पोर्टल के रूप में एकीकृत किया गया है। इससे कृषि उत्‍पादकता में वृद्धि होगी, किसानों को उचित निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा और अनुकूल परामर्श सहायता प्रदान करते हुए जोखिम को कम करेगा।

लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए,  संवर्धित और नवाचार वित्तपोषण के माध्‍यम से क्‍लस्‍टर स्‍तरीय संगठनों के भीतर सामुदायिक स्‍वामित्‍व वाले खुदरा आउटलेट के रूप में स्‍व-सहायता उद्यम (शी) मार्ट स्‍थापित किए जाएंगे।

वित्त मंत्री ने मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए निमहांस-2 की स्‍थापना की घोषणा की और रांची तथा तेजपुर में राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थानों को शीर्ष क्षेत्रीय  संस्‍थानों के रूप में अपग्रेड करने की बात कही।

वित्त मंत्री ने दुर्गापुर में बेहतर संपर्क नोड के साथ एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक कॉरीडोर के विकास, 5 पूर्वोदय राज्‍यों में 5 पर्यटन स्‍थलों के निर्माण और 4000 ई-बसों के प्रावधान का प्रस्‍ताव रखा। उन्‍होंने अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास हेतु एक योजना का प्रस्‍ताव रखा। इस योजना में मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थस्‍थल भाषांतरण केंद्र, संपर्क एवं तीर्थ यात्रियों की सुविधाएं शामिल होंगी।

राजकोषीय समेकन

ऋण से जीडीपी अनुपात संशोधित अनुमान 2025-26 में जीडीपी के 56.1 प्रतिशत की तुलना में, बजट अनुमान 2026-27 में जीडीपी के 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गिरता हुआ ऋण और जीडीपी अनुपात धीरे-धीरे ब्‍याज भुगतान पर व्‍यय को कम करके प्राथमिक क्षेत्र के व्‍यय के लिए संसाधनों को मुक्‍त करेगा। संशोधित अनुमान 2025-26 में, राजकोषीय घाटे का अनुमान जीडीपी के 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो 2025-26 के बजट अनुमान के बराबर है। ऋण समेकन की नई राजकोषीय दूरदर्शिता के अनुरूप, बजट अनुमान 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

संशोधित अनुमान 2025-26

गैर-ऋण प्राप्तियों का  संशोधित अनुमान 34 लाख करोड़ रुपये है। जिनमें से केंद्र की निवल कर प्राप्तियां 26.7 लाख करोड़ रुपये है। कुल व्‍यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड़ रुपये है जिनमें से पूंजीगत व्‍यय लगभग 11 लाख करोड़ रुपये है।

बजट अनुमान 2026-27

वर्ष 2026-27 में गैर-ऋण प्राप्तियां और कुल व्‍यय का अनुमान क्रमश: 36.5 लाख करोड़ रुपये और 53.5 लाख करोड़ रुपये है। केंद्र की निवल कर प्राप्तियों का अनुमान 28.7 लाख करोड़ रुपये है। राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण हेतु, दिनांकित प्रतिभूतियों से निवल बाजार उधारी का अनुमान 11.7 लाख करोड़ रुपये है। शेष वित्तपोषण छोटी बचतों और अन्‍य स्रोतों से आने की संभावना है। सकल बाजार उधारी का अनुमान 17.2 लाख करोड़ रुपये है। 

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *