साहित्य
‘तीसरा कमरा’
मैं पत्नी नहीं, मैं केवल स्त्री नहीं,मैं एक अधूरी आवाज़ हूँ जो अब पूरी होना चाहती है।’उसकी आँखों…
Read Moreतेरे जाने के बाद
तेरे जाने के बाद कमरा वही है, दीवारें वही हैं,बस हवा में अब तेरी हँसी नहीं तैरती,और खिड़की…
Read Moreडॉ. विजय नारायण पंडित के कहानी संग्रह “बड़े भाग मानुष तन पावा” का लोकार्पण सम्पन्न
कल्याण (पश्चिम) स्थित के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में 16–17 जनवरी 2026 को आयोजित…
Read Moreऊँची दहलीज
अंजलि ने चाय का गिलास रखा— ‘हिसाब बोल रही हूँ, हिसाब-किताब नहीं। घर चलाना है तो साफ़-साफ़ बात…
Read Moreस्वर्गीया नीलिमारानी:माई मदर, माई हीरो
मैंने आज जो कुछ भी अपने जीवन में असाधारण कामयाबी के रुप में हांसिल किया है, वह सबकुछ…
Read Moreलॉटरी का जादूगर
एक दिन मोहल्ले में लॉटरी टिकट बेचने वाला आया। रामकिशन ने बिना सोचे समझे पाँच टिकट खरीद लिए।…
Read Moreऑनलाइन बाबाजी (व्यंग्य कहानी)
‘हे भक्तों! युग बदल गया है। अब भक्ति भी डिजिटली होगी। दान पेटी का झंझट भूल जाओ। मेरे…
Read Moreठंडी दीवारें
चन्द्रकान्ता माँ की तरफ खाली आँखों से देखने लगी। आखिर माँ ने उठकर उसे छाती से लगा लिया।…
Read Moreरजाई
रजाई मास्टर ने देखा, उससे कई गुना अधिक हैसियत वाले लोग डिपो से राशन ले रहे हैं। परंतु…
Read Moreजुर्माना
जुर्माना उस दिन वह थककर जरा दम लेने के लिए बैठ गई थी। उसी वक्त दारोगाजी अपने इक्के…
Read Moreठूंठ में कोंपल
उस रात रीना बहुत बेचैन रही. उसकी आंखों की नींद उड़ चुकी थी, शरीर कसमसा रहा था. विचार…
Read Moreभारतेन्दु हरिश्चन्द्र:
खडीबोली हिन्दी के जन्मदाता जिन्हें खडीबोली हिन्दी-लेखनका दिव्य आशीर्वाद दिया स्वयं महाप्रभु जगन्नाथ ने १५ साल की उम्र…
Read Moreजमी हुई झील
पार्टी देर रात तक चली, शायद ढाई बज गए होंगे। बस, कुछ गिने-चुने घंटे बचे होंगे सुबह होने…
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