तेहरान: क्या इंटरनेट पर सबका समान अधिकार होना चाहिए? ईरान सरकार के एक नए फैसले ने दुनिया भर में इस डिजिटल बहस को फिर से छेड़ दिया है। ईरान अब एक ऐसा ‘टियर-बेस्ड’ (Tier-based) इंटरनेट सिस्टम लागू करने जा रहा है, जहाँ इंटरनेट की पहुँच आपकी ‘पहचान’ और आपके ‘काम’ पर निर्भर करेगी।
क्या है ‘इंटरनेट क्लासिफिकेशन’ सिस्टम?
इसे तकनीकी भाषा में ‘इंटरनेट क्लासिफिकेशन’ कहा जा रहा है। इस सिस्टम के तहत इंटरनेट यूज़र्स को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा:
- खास वर्ग के लिए खुला इंटरनेट: डॉक्टर, पत्रकार, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, सरकारी अधिकारी और बड़े व्यापारियों को बिना किसी पाबंदी वाला इंटरनेट मिलेगा। इन्हें विदेशी वेबसाइट्स और उन पोर्टल्स तक पहुँच दी जाएगी जो आम जनता के लिए ब्लॉक हैं।
- आम जनता पर डिजिटल पहरा: सामान्य नागरिकों के लिए इंटरनेट पहले से भी ज़्यादा सीमित होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और विदेशी न्यूज़ वेबसाइट्स पर भारी फिल्टर और पाबंदियां लगाई जाएंगी।
सरकार का तर्क बनाम विशेषज्ञों की चिंता
ईरान सरकार का कहना है कि यह कदम ‘साइबर सुरक्षा’ को मजबूत करने और सूचनाओं के सही प्रबंधन के लिए उठाया गया है। हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञ और मानवाधिकार संगठन इसे ‘डिजिटल भेदभाव’ करार दे रहे हैं। उनका मानना है कि यह अभिव्यक्ति की आज़ादी को पूरी तरह से नियंत्रित करने का एक नया हथियार है।
“यह कानून समाज को दो हिस्सों में बांट देगा—एक वो जिनके पास सूचना का अधिकार है, और दूसरे वो जिन्हें सिर्फ वही दिखेगा जो सरकार दिखाना चाहती है।”
भारत में इंटरनेट की स्थिति: एक नज़र
ईरान जैसे देशों में जहाँ इंटरनेट पर पाबंदियाँ बढ़ रही हैं, वहीं भारत दुनिया के सबसे बड़े और सबसे सस्ते डिजिटल बाज़ारों में से एक बनकर उभरा है। ट्राई (TRAI) की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 90 करोड़ को पार कर गई है। ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भी 4G और 5G की पहुँच तेज़ी से बढ़ी है। भारत में इंटरनेट न केवल सूचना का स्रोत है, बल्कि यह यूपीआई (UPI) के माध्यम से डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी बन चुका है। हालाँकि, साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी आज भी भारत के सामने बड़ी चुनौतियाँ हैं, जिन पर सरकार नए ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट’ (DPDP Act) के ज़रिए लगाम लगाने की कोशिश कर रही है।

