केंद्र सरकार द्वारा पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना के जरिये शिक्षा में ‘सोशल और जेंडर गैप’ समाप्त करने में मदद मिलेगी। सरकार द्वारा इस योजना को आरंभ करने का मुख्य लक्ष्य है कि बच्चों की उपस्थिति स्कूलों में बड़े और उन्हें बेहतर शिक्षा पोषण का विकास हो। इस योजना के माध्यम से स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी आत्मनिर्भर भी बनेंगे जिससे उन्हें किसी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस योजना से स्कूलों में गरीब छात्रों की उपस्थिति बढ़ेगी और उनके शिक्षा और पोषण का विकास होगा। पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना को आरंभ करने का मुख्य उद्देश्य है कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को पोषण सुनिश्चित किया जा सके ताकि स्कूलों में गरीब छात्रों की उपस्थिति बढ़ें।
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना का बजट
पोषण शक्ति निर्माण योजना के संचालन पर १.३१ लाख करोड रुपए खर्च किए जाएंगे। केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के संचालन के लिए ५४०६१.७३ करोड़ रुपए प्रदान किए जाएंगे एवं राज्यों का योगदान ३१७३३.१७ करोड़ रुपए का होगा। केंद्र पोषक अनाज खरीदने के लिए अतिरिक्त ४५,००० करोड़ों प्रदान करेगा। इसके अलावा पहाड़ी राज्यों में इस योजना के संचालन के लिए ९०ज्ञ् खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा एवं १०ज्ञ् खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से देश भर में सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों को भोजन उपलब्ध करवाया जाएगा। इस योजना को वर्ष २०२१-२२ से २०२५-२६ तक संचालित किया जाएगा। राज्य सरकारों से भी यह आग्रह किया गया है कि रसोइयों, खाना पकाने वाले सहायकों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से मानदेय प्रदान किया जाए। स्कूलों को भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से राशि उपलब्ध करवाई जाएगी
पोषण शक्ति निर्माण योजना की पात्रता एवं महत्वपूर्ण दस्तावेज
Pradhanmantri Poshan Shakti Nirman Yojana के तहत सरकार बच्चों को पोषण युक्त भोजन देती है. यानी स्कूल में पढ़नेवालेबच्चों को सिर्फ भोजन नहीं उसके बदले पोषक तत्वों से भरपूर भोजन उपलब्ध करवाना है. सरकार इसके मेन्यू में हरी सब्जियां, फल और प्रोटीन युक्त भोजन को शामिल करती है. न्यूज एजेंसी एएमआई के मुताबिक, केन्द्र सरकार पीएम पोषण योजना के तहत हर साल २०,००० करोड़ रुपये खर्च करती है. इस योजना जो पहले मिड-डे मील योजना के नाम सेभी जानी जाता था. इस योजना के तहत सरकार देश भर के सरकारी स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़नेवाले करीब १२ करोड़ से अधिक बच्चे को पोषण युक्त भोजन कराती है. पीएम पोषण योजना केन्द्र के तहत पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक के बच्चों को शामिल किया गया है. इस योजना में ५ साल से लेकर ११ साल की उम्र के करीब १२ करोड़ बच्चेलाभान्वित हैं. योजना का लाभ देश के ११.२० लाख स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे जिसमें बाल वाटिका के २२.६ लाख बच्चे, प्राथमिक से ७.२ करोड़ बच्चे और उच्च प्राथमिक से ४.६ करोड़ बच्चे शामिल हैं, गौरतलब है कि केंद्र सरकार स्कूली बच्चों को लेकर कई योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है. इसी कड़ी में पीएम पोषण योजना भी है. इस योजना के पीछे सरकार का मकसद है बच्चों मेंकुपोषण को दूर करना, और उन्हें पोषण युक्त भोजन देना. योजना के माध्यम से सरकार प्राथमिक कक्षाओं में पढ़नेवालेबच्चों को पोषण युक्त भोजन देती है. यानी स्कूल में पढ़नेवाले बच्चों को सिर्फ भोजन नहीं उसके बदलेपोषक तत्वों से भरपूर भोजन उपलब्ध करवाना है.Pm Poshan Shakti Nirman Yojana का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को दूर करना है. इसके लिए उन्हेंपोषण युक्त भोजन उपलब्ध कराना है. बच्चों को प्रोटीन, विटामिन और मिनरल युक्त भोजन कराया जाए जिससेबच्चों मेंकुपोषण न घर करे. इस योजना को साल २०२५ से २६ तक संचालित किया जाएगा. तब तक कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक के बच्चों की थाली में पोषणयुक्त भोजन परोसा जाएगा.
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना का खास मकसद हैकि बच्चों का संतुलित विकास हो. खास कर गरीब और सरकारी स्कूल में पढ़नेवाले बच्चों मेंकुपोषण की समस्या न हो और उनका ग्रोथ बेहतर हो. इसके लिए केन्द्र सरकार नेप्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना शुरू की है. पोषण आहार के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं लगता है. बच्चों को स्कूलों में मुफ्त भोजन मिलता है. योजना का मकसद यही हैकि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ भोजन भी मिले ताकि वेआगेचलकर आत्मनिर्भर और सशक्त बनें.