पुष्कर मेला

अजमेर से ११ किलोमीटर दूर हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पुष्कर है। पुष्कर में ५२ घाटों के साथ एक अर्धवृत्ताकार झील है, झील की अधिकतम गहराई १० मीटर है। यह एक पवित्र स्थान है और सभी तीर्थों के राजा के रूप में जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर इस झील में एक पवित्र डुबकी लगाई जाती है, जो सभी पापों को धोती है और मोक्ष की ओर ले जाती है। यहां पर कार्तिक पूर्णिमा को मेला लगता है। यह मेला कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा के दिन महास्नान के साथ संपन्न होता है। पंचतीर्थ स्नान का धार्मिक मेला ७ नवंबर को संपन्न होगा। मेले का रंग राजस्थान में देखते ही बनता है। मेला रेत के विशाल मैदान में लगता है।
इस मेले में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। पुष्कर झील भारतवर्ष के पवित्रतम स्थानों में से एक है। प्राचीन काल से लोग यहां प्रतिवर्ष कार्तिक मास में एकत्रित होकर भगवान ब्रह्मा की पूजा उपासना करते हैं। मान्यता है कि सृष्टि के रचियता जगत गुरु ब्रह्मा जी द्वारा किए गए यज्ञ के दौरान हाथ से कमल पुष्प छूटने से यहीं पर पवित्र पुष्कर सरोवर का उद्धव हुआ। इन दिनों यहां ३३ करोड़ देवी-देवताओं के साथ स्वयं ब्रह्मा जी का वास रहता है और स्नान व ध्यान से अक्षत फल की प्राप्ति होती है। कार्तिक मास में स्नान का हिंदू मान्यताओं में महत्त्व वैसे भी काफी ज्यादा है। इसलिए यहां साधु भी बड़ी संख्या में नजर आते हंै। पुष्कर मेले के दौरान इस नगरी में आस्था और उल्लास का अनोखा संगम देखा जाता है। चारों धामों की यात्रा करके भी यदि कोई व्यक्ति पुष्कर सरोवर में डुबकी नहीं लगाता है, तो उसके सारे पुण्य निष्फल हो जाते हैं। तीर्थ राज पुष्कर को पृथ्वी का तीसरा नेत्र माना जाता है। यहां एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है, तो दूसरी ओर दक्षिण स्थापत्य शैली पर आधारित रामानुज संप्रदाय का बैकुंठ मंदिर।
पुष्कर मेला — एक झलक
स्थान: पुष्कर, अजमेर ज़िला, राजस्थान
समय: हर साल कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर–नवंबर) के आसपास आयोजित होता है।
अवधि: लगभग ७ से १० दिन
२०२५ में अनुमानित तिथि: ६ नवंबर से १४ नवंबर (तिथि बदल सकती है)

मेला क्यों मनाया जाता है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार—
भगवान ब्रह्मा जी ने पुष्कर झील के किनारे यज्ञ किया था, इसलिए यह झील तीर्थराज पुष्कर कहलाती है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस झील में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं — यही कारण है कि लाखों श्रद्धालु इस समय यहाँ आते हैं।

मेला की खास बातें
ऊँट और मवेशी मेला:
दुनिया का सबसे बड़ा ऊँट मेला यहीं लगता है। हज़ारों ऊँट, घोड़े और गायें बिक्री के लिए आते हैं। ऊँट सजाने, दौड़, और व्यापार की अनोखी परंपरा देखने लायक होती है।
धार्मिक महत्व:
पुष्कर झील में कार्तिक स्नान
ब्रह्मा मंदिर दर्शन (भारत का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर) झील के घाटों पर दीपदान और आरती का मनमोहक दृश्य।
संस्कृतिक उत्सव:
लोक संगीत, नृत्य, पगड़ी बाँधने और मूंछ प्रतियोगिता। रेगिस्तानी तंबुओं में ठहरना और ऊँट सफारी का आनंद। हस्तशिल्प, गहने, कपड़े और स्थानीय भोजन का मेला।

क्या-क्या करें पुष्कर मेले में
गतिविधि अनुभव
ऊँट सफारी रेगिस्तान में सूर्यास्त का नज़ारा
हॉट एयर बलून राइड पूरे पुष्कर का ऊपर से दृश्य
लोक संगीत-नृत्य शो राजस्थानी परंपराओं की झलक
फोटोग्राफी रंग, चेहरे और संस्कृति का अद्भुत संगम
झील स्नान व आरती आध्यात्मिक और शांत अनुभव
🍛 क्या खाएँ
दाल-बाटी-चूरमा
मावा कचौरी
गट्टे की सब्ज़ी
रबड़ी और मखाने की खीर
(पुष्कर एक शुद्ध शाकाहारी तीर्थ स्थल है — यहाँ मांसाहार और शराब वर्जित हैं।)

ठहरने के विकल्प
लग्ज़री तंबू
मध्यम दर्जे के होटल
धर्मशालाएँ और आश्रम
(मेला के दौरान बुकिंग पहले से करना जरूरी है।)

🚆 कैसे पहुँचे
रेलवे स्टेशन: अजमेर जंक्शन (११ किमी दूर)
हवाई अड्डा: जयपुर एयरपोर्ट (१५० किमी)
सड़क मार्ग: जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर से सीधी बसें व टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

📸 यात्रा टिप्स
हल्के ऊनी कपड़े रखें (सुबह-शाम ठंड रहती है) कैमरा और पावरबैंक ज़रूर साथ लें
धार्मिक स्थल पर शालीन वस्त्र पहनें
कैश साथ रखें, क्योंकि हर जगह UPI नहीं चलता

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